आठ लोगो ने बचपन में किया बलात्कार, KBC में अमिताभ ने सुना तो…

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KBC 11
Sunita Krishnan with amitabh bachhan

एक लड़की के साथ बचपन में आठ लोगों ने रेप किया हो परन्तु वो टूटी नहीं आगे जाकर समाज सेविका बनी और पुरुषवादी समाज से लड़कर कई महिलाओं की सहायता भी की और आज KBC 11 के मंच पर पहुंची है। हम बात कर रहे है सुनीता कृष्णन की जिन्होंने अमिताभ बच्चन को अपना दर्द बयान किया। 2016 में उन्हें देश का चौथा सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री दिया जा चुका है।

सुनीता कृष्णन इस सप्ताह ‘KBC 11’ के स्पेशल एपिसोड कर्मवीर की मेहमान बनेंगी। इस एपिसोड का प्रोमो सामने आ चुका है, जिसमें समाज सेविका सुनीता बिग बी को आपबीती सुनाती दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि जब वे सिर्फ 15 साल की थीं, तब 8 लोगों ने उनका रेप किया था। यह सुनकर अमिताभ हैरान रह गए। गौरतलब है कि सुनीता एनजीओ प्रज्जवला की मुख्य अधिकारी और सह-संस्थापक हैं।

यह एनजीओ यौन तस्करी की शिकार महिलाओं-लड़कियों के बचाव और उनके पुनर्वास के लिए काम करता है। सुनीता के इस तरह काम करने से कई लोग उसके दुश्मन बन चुके है।

बिग बी ने की तारीफ
इस प्रोमो में बिग बी ने सुनीता के बारे में बताते हुए कहा, “22 हजार से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को यौन तस्करी से आजाद किया है। कभी हार न मानने वाली कर्मवीर सुनीता कृष्णनजी नमन करते हैं आपको।”

कई बार हो चुका है जानलेवा हमला
‘केबीसी’ में बात करते हुए सुनीता ने बताया कि उनके काम के चलते अब तक उन पर लगभग 17 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। हालांकि, वे मरने से नहीं डरतीं। वे कहती हैं, “जब तक मेरी सांस है, तब तक दूसरी लड़कियां, जो इस तरह से पीड़ित वेश्यालयों में हैं, उनके लिए मैं अपनी जिंदगी को कमिट करूंगी।”

बचपन से ही समाज सेवा में
बैंगलुरु में जन्मी सुनीता कृष्णन को बचपन से ही समाज सेवा का शौक है। जब वे 8 साल की थीं, तब उन्होंने मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को डांस सिखाना शुरू कर दिया था। 12 साल की उम्र में वे वंचित बच्चों के लिए झुग्गियों में स्कूल भी चला चुकी है।

सुनीता के बारे में बात करें तो 15 की उम्र में जब वे दलित कम्युनिटी के लिए नव साक्षरता अभियान चला रही थीं, तब 8 लोगों ने उनका बलात्कार किया था। उन्हें उनके पुरुष प्रधान समाज में एक महिला की दखलंदाजी पसंद नहीं आई। 

इसके अलावा सुनीता को बुरी तरह पीटा भी गया था। इससे उनका एक कान भी आंशिक रूप से डैमेज हो गया और उन्हें कम सुनाई देने लगा। हालांकि, सुनीता ने हार नहीं मानीं और अपने समाज सेवा के काम को आज भी जारी रखा है।