Mughal Harem: अकबर की 300 पत्नियां, हरम में 5000 महिलाएं, जानिए मुग़ल हरम में महिलाओं की दशा…

Mughal Harem: अकबर की 300 पत्नियां, हरम में 5000 महिलाएं, जानिए मुग़ल हरम में महिलाओं की दशा...

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Mughal Harem
Mughal Harem: अकबर की 300 पत्नियां, हरम में 5000 महिलाएं, जानिए मुग़ल हरम में महिलाओं की दशा...

मुगल काल के बादशाहों के महल में हरम भी होता था। हरम एक ऐसा स्थान होता था जहां महल से जुड़ी स्त्रियां रहती थीं। इसमें बादशाह की बेगमों, शहजादियों के अलावा बड़ी तादाद में उनकी सेविकाएं रहती थीं। इसके अलावा बादशाह की सभी महिला रिश्तेदारों का भी वो आवास होता था। हरम (Mughal Harem) में महिलाओं की संख्या बहुत ज्यादा होती थी। चलिए आज बात करते है कि हरम में रहने वाली इन महिलाओं के साथ क्या सलूक किया जाता था.

अकबर के हरम में 5000 महिलाएं और 300 पत्नियां

मुगल काल के लेखक अबुल फजल के मुताबिक अकबर के हरम में 5000 हजार महिलाएं थीं, जबकि बाबर और हिमायूं के समय ये संख्या केवल 300-400 थी। कुछ विदेशी इतिहासकारों के अनुसार अकबर की तो 300 पत्नियां ही थीं, जो राजनीतिक संधियों और अस्थायी विवाह के माध्यम से पत्नी बनी थीं। बादशाह से जुड़ी हर खास महिला के लिए हरम (Mughal Harem) में अलग-अलग कमरे बने होते थे।

राजपूत राजा मान सिंह के महल में भी हरम

अबुल फजल ने राजपूत राजा मान सिंह के महल में भी हरम होने का जिक्र किया है। उनके मुताबिक मान सिंह के हरम (Mughal Harem) में 1500 स्त्रियां थी। मुगलों के शाही हरम आगरा, दिल्ली, फतेहपुर सिकरी और लाहौर में बनाए गए थे। इन हरम बादशाह और उसके खास अधिकारी टिकते थे। मुगलों ने अहमदाबाद, बहरानपुर, दौलताबाद, मांडू और श्रीनगर में भी मुगलों के हरम थे।

हरम की संचालन व्यवस्था

हरम (Mughal Harem) को चलाने के लिए एक प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई थी। हरम के प्रशासन में शामिल सभी कर्मचारी या तो महिला थीं या हिजड़े थे। हरम कितना महत्वपूर्ण था इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बादशाह भोजन करने और सोने के लिए हरम में ही जाता था। हरम के भोजन की जांच के लिए महिला कर्मचारी नियुक्त थीं। हरम में मुख्य दारोगा, खजांची और साधारण नौकर तक नियुक्त होते थे जिन्हें बाकायदा वेतन दिया जाता था।

हरम का सुरक्षा घेरा

हरम (Mughal Harem) की सुरक्षा के कई घेरे थे। हरम के अंदर महिला सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति होती थी। उसके बाद का घेरा किन्नरों का था। किन्नरों के बाद राजपूतों को सुरक्षा सौंपी गई थी। सबसे बाहरी घेरे पर द्वारपाल मुगल सैना के जवान तैनात रहते थे।

हरम में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित

हरम (Mughal Harem) के अंदर रहने वाले लोगों के लिए काफी कठोर नियम बनाए गए थे। हरम में रहने वाली स्त्रियों को बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। किसी जरूरी कार्य से बाहर जाना पड़े तो पूरे परदे में ही महिला बाहर जा सकती थी। इसी तरह हरम में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित था। विशेष परिस्थितियों में अगर किसी को जाना पड़ता था तो सुरक्षा में तैनात हिजड़े उन्हें परदे में रखकर ही अंदर ले जाते थे। इटली के यात्री मनूची ने हरम में जाने के अपने संस्मरण को लिखा है। वो बताता है कि हरम (Mughal Harem) की स्त्रियों के बीमार पड़ने पर उनको दवा देने के लिए वो कई बार हरम (Mughal Harem) में गया था। इस दौरान हिजड़े उसे पर्दे में लेकर महिलाओं के पास ले जाते थे।

हराम के अंदर का जीवन

महिला और उसके बीच एक पर्दा होता था जिसमें हाथ डालकर वो महिलाओं की रोग को चेक करता था। इस दौरान कई महिलाएं उसके हाथ को पकड़ कर चूमती थीं और कुछ महिलाओं ने उसके हाथ को अपने स्तन तक ले जाती थीं। इस दौरान वो चुपचाप रहता था ताकि बाहर उसके साथ खड़े हिजड़ों को कई संदेह ना हो। मनूची के मुताबिक हरम (Mughal Harem की स्त्रियां बाहर के पुरुषों को देखने के लिए तरस जाती थीं, और कई बार बीमारी और दूसरे बहाने बनाकर गैर-मर्द को देखने और छूने की कोशिश करती थीं।

हरम में मनोरंजन के भरपूर साधन

चुंकि हरम (Mughal Harem) में रहने वाली महिलाओं को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी इसलिए उनके मनोरंजन की खास व्यवस्था की जाती थी। हरम में नृत्य और संगीत में निपुण महिलाएं अपनी कला का प्रदर्शन करती थीं। किताबें भी खूब पढ़ी जाती थीं।

हरम में स्त्रियों की दशा

हरम (Mughal Harem) में रहने वाली स्त्रियां पूरी तरह बादशाह के आशीर्वाद पर अपना जीवन व्यतीत करती थीं। महिलाओं की स्थिति का निर्धारण बादशाह तय करता था। बादशाह की बेगमों में होड़ रहती थी कि कौन पहले बेटा पैदा करता है। बेटा पैदा करने वाली बेगम की दर्जा ऊंचा हो जाता था। हरम के अंदर आपसी जलन और प्रतिस्पर्धा में साजिशों को भी रचा जाता था।

अकबर ने बनाए थे नियम

बाबर और हुमायूं के चार चार से अधिक बीवियां थीं, और कई रखैलें भी थीं, परन्तु उनके जीवन में स्थायित्व का अभाव था, इसलिए वह एक स्थान पर हरम नहीं बना पाए थे। एक संस्थान के रूप में हरम की स्थापना अकबर के समय में हुई थी और उसी के अधीन यह ऐसे काम करता था जैसे कोई सरकारी विभाग करता है।

एक पुस्तक में लिखा है कि “सबसे रोचक बात यह है कि अकबर एक औरत से जीवन भर के लिए निकाह करता था, जैसे हिन्दू जीवन भर साथ का वचन देते हैं और उसने कभी तलाक नहीं दिया था। उसके हरम (Mughal Harem) में आने वाली औरत हमेशा के लिए हरम में आती थी। और यहाँ तक कि बादशाह की विधवाओं को भी दोबारा शादी करने की अनुमति नहीं थी और बादशाह के मरने के बाद उन्हें विधवा के रूप में शेष जीवन सोहागपुर नामक महल में बितानी होती थी।”

अकबर को नई नई लडकियां चाहिए थीं

इसी में वह आगे लिखते हैं कि अकबर को नई नई लडकियां चाहिए होती थीं और वह हर औरत, जिसपर उसका दिल आ जाता था, जिसमें अब्दुल वासी की खूबसूरत बीवी भी शामिल थी, जिसका तलाक अकबर ने करवा दिया था।

फिर इसमें हैं कि गुलाम बाज़ार से गुलाम औरतों को खरीदा जाता था। जबकि हिन्दू भारत में अर्थात मौर्यकाल में मेगस्थनीज ने लिखा है कि हिन्दू समाज की एक विशेषता बहुत ख़ास है कि यहाँ पर वह गुलामी की परम्परा नहीं है, जो ग्रीस और रोमन जगत में बहुत आम थी।

इसमें और एक विशेष बात है कि यदि हरम (Mughal Harem) में राजनीतिक सम्बन्धों के चलते ऐसी लड़की आ जाती थी जो सुन्दर नहीं होती थी तो बादशाह के बिस्तर तक वह नहीं जा पाती थी, वह ऐसी औरत हो जाती थी, जिसके लिए कोई ठौर ठिकाना नहीं होता था। और हरम की चार दीवारों में ही अपनी अतृप्त इच्छाओं के चलते मर जाती थी, कोई भी उसे देखने वाला नहीं होता था और उसे बचाने वाला भी कोई नहीं होता था।

हिजड़े ही हरम से जुड़े काम कर सकते थे

मुग़ल काल में हिजड़ों की नियुक्ति हरम (Mughal Harem) के निवासों की रखवाली के लिए की जाती थी, और उन्हें भी भीतर जाने की अनुमति नहीं थी। मगर वह हरम (Mughal Harem) के अधिकारियों और हरम की नौकरानियों के बीच एक कड़ी होते थे। अर्थात हरम की कनीज भी बाहरी मर्द अधिकारियों से बात नहीं कर सकती थीं।

इन अय्याश बादशाहों का औरतों पर इतना नियंत्रण रहता था कि अगर उनके हरम (Mughal Harem) की कोई औरत (कनीज़ ही क्यों न हो) हिजड़ों को ही मातृत्व भाव से चूम नहीं सकती थी। जहाँगीर की एक कनीज का क़त्ल खुद जहांगीर ने इसीलिए करवा दिया था कि उसने एक हिजड़े को सहज वात्सल्य भाव से माथे पर चूम लिया था।

अमीरी गरीबी के फर्क के साथ सतीप्रथा का था चलन

मुग़ल काल के समय समाज में एकरसता का प्रचलन था, लेकिन अमीर लोगों के बीच एक आदमी कई पत्नियां रख सकता था। विधवा फिर से शादी नहीं कर सकती थी। वे या तो अपने पति की चिता पर सती हो गईं या महिला-पुरुष के रूप में अपना जीवन व्यतीत करने लगीं। मुसलमानों को हमेशा या तो छेड़छाड़ करने के लिए या हिंदू-महिलाओं को पकड़ने के लिए तैयार किया जाता था, जिसके परिणामस्वरूप बाल-विवाह और पुरदाह व्यवस्था होती थी।

बेटी पैदा होना बुरा सगुन

इसने समाज में उनकी शिक्षा और आंदोलनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला। इसलिए, उन्हें केवल घरों में शिक्षा प्रदान की जा सकती थी जो केवल अमीरों द्वारा वहन की जा सकती थी। बेटी के जन्म को एक बुरा शगुन माना जाता था और इसके परिणामस्वरूप महिला-शिशु हत्या का चलन था। हालाँकि, निचली जातियाँ इनमें से कई सामाजिक बुराइयों से मुक्त रहीं। उनमें कोई पुरदाह व्यवस्था नहीं थी और उनकी औरतें तलाक और पुनर्विवाह के लिए स्वतंत्र थीं। यहां तक कि उनके बीच विधवा-विवाह की भी अनुमति थी।

अविवाहित लड़कियों का सुन्दर होना भी था गुबाह ?

देवदासी प्रणाली एक और सामाजिक बुराई थी जो हिंदुओं में प्रचलित थी। सुंदर अविवाहित लड़कियों को भगवान पाप मंदिरों की छवियों की पेशकश की गई थी, जहां उन्होंने अपना जीवन देवताओं के नौकरानियों के रूप में गुजारा। यह न केवल उनके जीवन के लिए गंभीर अन्याय था, बल्कि मंदिरों में भ्रष्टाचार भी था। कुछ अन्य परिवर्तन थे जो मुसलमानों के संपर्क के कारण हिंदुओं ने स्वीकार किए थे। हिंदुओं ने धर्मान्तरित हिन्दू-धर्म को स्वीकार करना शुरू कर दिया। उनके कपड़ों, खान-पान, सामाजिक आदतों और कुछ रीति-रिवाजों में भी बदलाव हुए।

मुस्लिम महिलाओं को भी करना पड़ता था प्रताड़ना का सामना

मुस्लिम महिलाओं को भी समाज में सम्मानजनक स्थिति प्राप्त नहीं थी। बहुविवाह मुसलमानों में व्यापक रूप से प्रचलित था। प्रत्येक मुसलमान को कम से कम चार पत्नियाँ या दास रखने का अधिकार था। पुरोधा- प्रणाली को मुस्लिम-महिलाओं के बीच सख्ती से देखा गया था। वे इस सामाजिक-प्रथा के कारण शिक्षा से रहित थे। हालांकि, हिंदू महिलाओं की तुलना में उन्हें कुछ मामलों में बेहतर रखा गया था। वे अपने पति, पुनर्विवाह को तलाक दे सकते थे और अपने माता-पिता की संपत्ति में अपने हिस्से का दावा कर सकते थे। मुस्लिम महिलाओं में सती प्रथा नहीं थी।

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