गाँधीजी के करीब दिखने वाली महिलाएं और उनकी ‘आध्यात्मिक पत्नी’ के बारे में जानिए ?

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महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)
Mahatma gandhi & Women (Pic credit-Amar Ujala)

महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) को ज्यादातर भीड़ के साथ साथ देखा जाता है और उसमे कई महिलाएं भी दिखाई देती है. कुछ लोगों का कहना है कि गाँधी जी ज्यादातर महिलाओं के साथ दिखाई देते थे. बात यह भी सही है कि कई महिलाएं महात्मा गाँधी के जीवन और उनके विचारों से प्रेरित थी. आइये बात करते है उन महिलाओं कि जो गांधीजी के आस पास दिखाई देती थी.

मनु
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी प्रतिष्ठित पत्रकार थे. उनकी ही बेटी मनु लम्बे समय तक अपने दादा महात्मा गांधी के साथ रहीं थी. वे खुद को मनु की मां कहते थे क्योंकि मनु की मां का उसकी छोटी उम्र में ही निधन हो गया था.
माना जाता है कि महात्मा गाँधी कि मृत्यु के समय भी मनु उनके साथ ही थी जब गाँधी गिरे तो मनु को उन्होंने एक तरफ धकेल दिया. बीबीसी कि रिपोर्ट के अनुसार गांधी गिर जाते हैं, ‘हे राम…’ कहते हैं और उस महिला की बाहों में दम तोड़ देते हैं, जो उनके अंतिम वक़्त के संघर्ष और तकलीफ़ों की गवाह होती है.

आभा
आभा की शादी गांधी के परपोते कनु गांधी से हुई. गांधी की प्रार्थना सभाओं में आभा भजन गाती थीं और कनु फोटोग्राफी करते थे. 1940 के दौर की महात्मा गांधी की काफी तस्वीरें कनु की ही खीची हुई हैं. आभा नोआखाली में गांधी के साथ रहीं. ये वो दौर था, जब पूरे मुल्क में दंगे भड़क रहे थे और गांधी हिंदू-मुस्लिम के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटे हुए थे.

मेडेलीन
मेडेलीन ब्रिटिश एडमिरल सर एडमंड स्लेड की बेटी थीं. गांधी पर लिखी रोमैन की बायोग्राफी ने मेडेलीन को काफी प्रभावित किया. गांधी का प्रभाव मेडेलीन पर इस कदर रहा कि उन्होंने ज़िंदगी को लेकर गांधी के बताए रास्तों पर चलने की ठान ली. मेडेलीन ने गांधी का अख़बार यंग इंडिया भी पढ़ना शुरू किया. अक्टूबर 1925 में वो मुंबई के रास्ते अहमदाबाद पहुंची. गांधी से अपनी पहली मुलाकात को मेडेलीन ने कुछ यूं बयां किया, ‘जब मैं वहां दाखिल हुई तो सामने से एक दुबला शख्स सफेद गद्दी से उठकर मेरी तरफ बढ़ रहा था. मैं जानती थी कि ये शख्स बापू थे. मैं हर्ष और श्रद्धा से भर गई थी,मुझे बस सामने एक दिव्य रौशनी दिखाई दे रही थी. मैं बापू के पैरों में झुककर बैठ जाती हूं. बापू मुझे उठाते हैं और कहते हैं- तुम मेरी बेटी हो. मेडेलिन और महात्मा के बीच इस दिन से एक अलग रिश्ता बन गया। बाद में मेडेलिन का नाम मीराबेन पड़ गया.

निला नागिनी
अमरीका में जन्मी निला को मैसूर के राजकुमार से इश्क हुआ. निला ने 1932 में गांधी को बंगलुरु से पहली बार खत लिखा था. इस खत में उन्होंने छुआछूत के खिलाफ किए जा रहे कामों के बारे में गांधी को बताया.

महात्मा गांधी से निला की मुलाकात यरवडा जेल में हुई. गांधी ने निला को साबरमती आश्रम भेजा, उदार ख्यालों वाली निला के लिए आश्रम जैसे एकांत माहौल में फिट होना मुश्किल भरा रहा. ऐसे में वो एक दिन आश्रम से भाग गईं.

सरला देवी
अपने नाम के अनुसार ही वो स्वाभाव से सरल थी. सरला देवी की भाषाओं, संगीत और लेखन में गहरी रुचि थी। सरला रविंद्रनाथ टैगोर की भतीजी भी थीं। लाहौर में गांधी सरला के घर पर ही रुके थे. अमर उजाला कि एक रिपोर्ट के अनुसार दोनों एक-दूजे के काफी करीब रहे और इस करीबी को समझने का एक अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि गांधी सरला को अपनी ‘आध्यात्मिक पत्नी’ बताते थे.

सरोजनी नायडू
सरोजनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थी. गांधी की गिरफ्तारी के बाद नमक सत्याग्रह की अगुवाई सरोजिनी के ही कंधों रही. जब सरोजिनी और गांधी की पहली मुलाकात लंदन में हुई तो इस मुलाकात को सरोजिनी ने कुछ यूं बयां किया, ”एक छोटे कद का आदमी, जिसके सिर पर बाल नहीं थे. जमीन पर कंबल ओढ़े ये आदमी जैतून तेल से सने हुए टमाटर खा रहा था. दुनिया के मशहूर नेता को यूं देखकर मैं खुशी से हंसने लगी. तभी वो अपनी आंख उठाकर मुझसे पूछते हैं, ‘आप जरूर मिसेज नायडू होंगी. इतना श्रद्धाहीन और कौन हो सकता है? आइए मेरे साथ खाना शेयर कीजिए.”

राजकुमारी अमृत कौर
शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली राजकुमारी पंजाब के कपूरथला के राजा सर हरनाम सिंह की बेटी थीं. राजकुमारी अमृत कौर को गांधी की सबसे करीबी सत्याग्रहियों में गिना जाता था. 1934 में हुई पहली मुलाकात के बाद गांधी और राजकुमारी अमृत कौर ने एक-दूसरे को सैकड़ों खत भेजे. नमक सत्याग्रह और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वो जेल भी गईं.
गांधी राजकुमारी अमृत कौर को लिखे खत की शुरुआत ‘मेरी प्यारी पागल और बागी’ लिखकर करते और खत के आखिर में खुद को ‘तानाशाह’ लिखते. आजाद भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनने का सौभाग्य भी राजकुमारी अमृत कौर को मिला.

सुशीला
सुशीला और प्यारेलाल दोनों बहन भाई थे. मां के तमाम विरोध के बाद ये दोनों भाई-बहन गांधी के पास आने से खुद को नहीं रोक पाए थे. कहते है कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद सुशीला महात्मा गांधी की निजी डॉक्टर बनीं. मनु और आभा के अलावा अक्सर गांधी जिसके कंधे पर अपने बूढ़े हाथ रखकर सहारा लेते, उनमें सुशीला भी शामिल थीं.

महात्मा गांधी का पूर्ण विश्वास था कि जिस देश की आधी आबादी सक्रिय नहीं होगी, उसका पतन सुनिश्चित है. दक्षिण अफ्रीका में जब गांधी मात्र 30 वर्ष के थे, उसी समय से उन्होंने नारी मुक्ति आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों की अगुआई करना प्रारंभ कर दिया था. वहां की भी महिलाएं गांधी के काम को जानती थीं. भारत लौटने के बाद उन्होंने गांव और शहरों में सभी जगह घूम-घूमकर स्त्रियों को सक्रिय करना प्रारंभ कर दिया था.

अमर उजाला व बीबीसी के कुछ लेखों के अनुसार:-