KBC-14 की पहली करोड़पति बनीं 12वीं पास कविता चावला…

हम बात कर रहे हैं महाराष्ट के कोल्हापुर की रहने वाली कविता चावला की, जो ‘कौन बनेगा करोड़पति 14’ (KBC-14) की पहली करोड़पति हैं. वह एक हाउसवाइफ हैं और केबीसी में आने के लिए उन्होंने करीब 21 सालों तक मेहनत की. बीते एपिसोड में उन्होंने 1 करोड़ रुपये जीत लिए थे. हालांकि, 7.5 करोड़ रुपये के सवाल पर उन्होंने गेम को क्विट कर दिया था.

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KBC-14
KBC-14 की पहली करोड़पति बनीं 12वीं पास कविता चावला...

Kaun Banega Crorepati 14 Update: सोनी टीवी का क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जब से शुरू हुआ है, इस शो में आने का हर एक आदमी सपना देखता है. बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) द्वारा होस्ट किए जाने वाले इस शो का 14वां सीजन चल रहा है. शो में अभी तक कई कंटेस्टेंट आए और गए, लेकिन अभी तक किसी ने करोड़पति का टाइटल नहीं लिया था. हालांकि, अब सीजन को पहली करोड़पति मिल गई हैं. हालांकि, वह 7.5 करोड़ रुपये के सवाल का जवाब नहीं दे पाई थीं.

हम बात कर रहे हैं महाराष्ट के कोल्हापुर की रहने वाली कविता चावला की, जो ‘कौन बनेगा करोड़पति 14’ (KBC-14) की पहली करोड़पति हैं. वह एक हाउसवाइफ हैं और केबीसी में आने के लिए उन्होंने करीब 21 सालों तक मेहनत की. बीते एपिसोड में उन्होंने 1 करोड़ रुपये जीत लिए थे. हालांकि, 7.5 करोड़ रुपये के सवाल पर उन्होंने गेम को क्विट कर दिया था.

मैंने न कभी दिन में आराम किया, न टीवी देखी और न सहेलियों के साथ गप्पें मारीं। हॉट सीट पर बैठने की ख्वाहिश के चलते अपनी हर छोटी-बड़ी पसंद को पीछे रखा। यह कहना है मेहनत, लगन और जुनून की मिसाल बनने वाली केबीसी सीजन-14 की पहली करोड़पति कविता चावला का। पढ़िए, 45 वर्षीय हाउसवाइफ कविता चावला की कहानी, उन्हीं की जुबानी…

मैं कोल्हापुर से भी पहली हूं, जो केबीसी (KBC-14) में इस मुकाम तक पहुंची हूं। करोड़पति बनने और खासकर पहली का तमगा हासिल करने के अहसास को शब्दों में बयां नहीं कर सकती। बस समझ लीजिए कि कछुए की चाल से चलकर यहां तक पहुंची हूं।

बचपन संघर्ष करते बीता। शादी के बाद नमक, तेल और खटाई में पड़ गई, लेकिन केबीसी ने मुझे दीन-दुनिया से जोड़े रखा। घर-परिवार की जिम्मेदारी, मेरी पढ़ाई, संसाधनों का अभाव और टेक्नोलॉजी में निल बट्टे सन्नाटा होने जैसी कई दिक्कतें आड़े आईं। केबीसी में पहुंचने के लिए 21 साल और 10 महीने से लगातार प्रयास कर रही थी।

कभी कॉल पिक नहीं कर पाई तो कभी प्रोसेस पूरा नहीं कर पाई। कभी एक सवाल गलत हो गया तो कभी टेक्नोलॉजी के चलते केबीसी के मंच तक आकर भी हॉट सीट पर नहीं बैठ पाई, लेकिन मैंने कभी भी उम्मीद की डोर को कमजोर नहीं पड़ने दी। मेरे सफर में परिवार ने बहुत सपोर्ट किया। सास ने घर संभाल, ससुर और पति ने मुझ पर भरोसा जताया।

12वीं तक ही पढ़ सकी, मां की मदद के लिए सीखी सिलाई – Could study till 12th only, learned sewing to help mother

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पापा गुरुबख्श राय निरंकारी ने कई कामों में हाथ आजमाया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। पापा बाद में हम सबको लेकर कोंकण में अपने गांव लौट गए। हम भाई-बहनों की पढ़ाई कोंकण से ही हुई। पिता ने सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई करने की इजाजत दी, लेकिन टीचर्स के समझाने पर उन्होंने मुझे 12वीं तक पढ़ने दिया। घर की खराब स्थिति के चलते मैं आगे पढ़ने की जिद भी नहीं कर सकी।

मां सिलाई करती थी, जिससे परिवार को दो वक्त का खाना नसीब हो पाता था। 12वीं के बाद मैंने मां की मदद करने के लिए सिलाई का काम शुरू कर दिया। आठ घंटे सिलाई करती, तब जाकर 20 रुपए मिलते। 20 रुपए से 3 लाख 20 हजार रुपए कमाने के सफर में 30 साल लग गए। यह रकम मेरी पहली कमाई थी, जो केबीसी के मंच पर जीती थी।

हालांकि, अब एक करोड़ रुपए जीत लिए हैं। मैं 7.5 करोड़ रुपए के 17वें सवाल यानी जैकपॉट तक पहुंची, लेकिन मुझे उसका सही जवाब नहीं पता था। अगर मैं उस सवाल का गलत जवाब देती तो मुझे सिर्फ 75 लाख रुपए मिलते और मैं करोड़पति नहीं बनती। इसलिए मैं एक करोड़ रुपए लेकर गेम से बाहर हो गई।

शादी के एक साल बाद से ही KBC बन गया मिशन – KBC became mission after one year of marriage

साल 1999 में मेरी शादी कोल्हापुर में हो गई। पति विजय चावला की कपड़े की दुकान है। साल 2000 में मैं एक बेटे की मां बन गई। मुझे आज भी याद है कि मैं अपने बेटे को गोद में लेकर हॉल में टीवी के सामने सोफे पर बैठी थी। 3 जुलाई, 2000 को केबीसी सीजन-1 का पहला एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुआ था।

मुझे ये प्रोग्राम बड़ा अच्छा लगा, जिसमें देखने वालों के लिए जानकारी है और सवालों के जवाब देने वालों को पैसे मिलते हैं। उसी वक्त मैंने सोफे पर बैठे-बैठे ही हॉट सीट तक पहुंचने का सपना देख लिया था। तब से मेरी दुनिया घर-परिवार, बेटे की जिम्मेदारी और केबीसी (KBC-14) की तैयारी तक ही सीमित रही। लोगों से बहाने बनाकर पढ़ने का वक्त निकालती।

KBC के मंच पर आकर लौटना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी – Had to return to the stage of KBC, but did not give up

मैंने अपने सास-ससुर, पति और बेटे को भी नहीं बताया कि मैं पढ़ाई क्यों कर रही हूं, उनको हमेशा यही कहा कि मुझे पढ़ना पसंद है। हर साल लैंडलाइन के जरिए केबीसी में पहुंचने के लिए कोशिश करती, लेकिन कॉल आती तो पता ही नहीं चल पाता।

साल 2012 में पहली बार मेरे हाथ में मोबाइल आया तो उससे कोशिश की। केबीसी से कॉल भी आया, लेकिन आगे की प्रक्रिया पूरी कैसे करनी है, यह समझ ही नहीं आया, इसलिए केबीसी में नहीं पहुंच पाई। 6 साल बाद 2018 में फिर कॉल आई, तब एक सवाल गलत हो गया। 2020 में ऑडिशन तक पहुंची, लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ।

साल 2021 में मैं केबीसी के मंच पर टॉप-10 कैंडिटेट्स में शामिल हुई, लेकिन कंप्यूटर की नॉलेज नहीं थी, इसलिए फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड में तेजी से जवाब लॉक न कर पाने के चलते हॉट सीट तक नहीं पहुंच सकी। जब लौटकर घर आई तो परिवार वाले उदास हुए, उन्हें मुझसे उम्मीदें थीं, जो टूट चुकी थीं। आस-पड़ोस के लोगों ने ताने कसे। मैंने किसी को पलटकर जवाब नहीं दिया, बस फिर से तैयारी में लग गई। बेटे विवेक ने मुझे कंप्यूटर सिखाया। तब जाकर सीजन-14 मैं हॉट सीट तक पहुंची हूं।

बेटे की पढ़ाई पर खर्च करूंगी प्राइज मनी – I will spend the prize money on my son’s education

जब मैंने एक करोड़ जीत लिए और पति को कॉल कर प्रैंक करते हुए बताया कि मैंने 3 लाख 20 हजार जीते हैं, तो उन्होंने मान लिया, लेकिन जब एक करोड़ जीतने की बात बताई तो वह भरोसा करने को तैयार ही नहीं हुए। मैंने अपने ससुराल और मायके वालों के लिए सरप्राइज रखा था, उन्हें नहीं बताया, लेकिन टीवी पर प्रोमो देखने के बाद उन्हें सब पता चल गया।

सब बहुत खुश हैं। मेरे बेटे और पति का कहना है कि यह मेरी मेहनत का फल है। विदेश में बेटे की पढ़ाई पूरी कराने के लिए हमने अच्छा-खासा लोन ले रखा है। बीसीए करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बेटा लंदन चला गया। मैं केबीसी के मंच से जीती धनराशि से सबसे पहले बैंक का लोन चुकाऊंगी। बचे हुए पैसे को बेटे की आगे की पढ़ाई पर खर्च करूंगी।

पढ़ाई के लिए अपनाई स्ट्रेटजी – Strategy adopted for studies

मैं बेटे को पढ़ाते और उसका होमवर्क कराते हुए उसकी किताबें पढ़ती। हर दिन घर का कामकाज निपटाकर अच्छे से अखबार पढ़ती। अगर कहीं से फटे-पुराने अखबार या फिर किताब टुकड़ा भी हाथ लग जाता तो उसे भी उठाकर पढ़ लेती। पढ़ाई ही है जिस कारण मेरे और बेटे के बीच मां-बेटे से ज्यादा दोस्तों वाला रिश्ता है। उसके दोस्तों के बीच मैं ‘कूल मॉम’ के तौर पर जानी जाती हूं।

मेघालय का चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल देखने की है ख्वाहिश – Wish to see the Cherry Blossom Festival of Meghalaya

अगर निजी जिंदगी की बात करूं तो मुझे मिठाइयां खाना बहुत पसंद है, इसलिए मैं खूब स्वीट डिश बनाती हूं और खाती भी हूं। बेटे को मेरे हाथ की पनीर भुर्जी बहुत पसंद है। किचन का काम मुझे थोड़ा उबाऊ लगता है, हर रोज वही दाल-चावल और चपाती। उबाऊपन दूर करने के लिए पुराने गाने सुनना, गुनगुनाना और गाने को इंग्लिश एक्सेंट में गाती हूं। इस कारण मेरी बिल्डिंग के बच्चे मुझे ‘इंग्लिश दीदी’ कहते हैं। मैंने अमिताभ बच्चन के कहने पर ‘गुम है किसी के प्यार में’ गाने को इंग्लिश एक्सेंट में गाकर सुनाया, जिसकी उन्होंने खूब तारीफ की।

पिछले 22 सालों में मैं पारिवारिक समारोह को छोड़कर कहीं और घूमने नहीं गई। अब मैं अपने वो सारे शौक पूरे करूंगी, जिन्हें मैंने हॉट सीट पर बैठने की चाह में छोड़ दिया था। परिवार के साथ मेघालय में हर साल आयोजित होने वाले चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल को देखने जाऊंगी। मैंने इस समारोह के वीडियो देखे हैं, बहुत खूबसूरत होता है, तभी से इस फेस्टिवल को देखना चाहती हूं।

पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया हम आशा करते है कि आज के आर्टिकल KBC-14 Winner Kavita chawla से जरूर कुछ सीखने को मिला होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे शेयर करना ना भूले और ऐसे ही अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे THEHALFWORLD वेबसाइट के साथ चलिए मिलते है नेक्स्ट आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा, धन्यवाद !