#noshavenovember का हिस्सा क्यों नहीं बनती महिलायें?

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#noshavenovember
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नो शेव नवंबर(#noshavenovember). शायद आप लोग इस बारे में नहीं जानते हो. दरअशल, यह एक कैंपेन है जो कैंसर पेशेंट्स को सपोर्ट करने के लिए शुरू हुआ था. नवंबर के महीने में लोग अपने बॉडी-हेयर को शेव या ग्रूम नहीं करते. उससे जितने पैसे बचते हैं वो पैसे कैंसर पेशेंट्स के ट्रीटमेंट के लिए डोनेट किए जाते हैं. लेकिन लड़कियां इस कैम्पेन में पार्ट नहीं लेतीं और क्यों वो अपने बॉडी हेयर को सेलिब्रेट नहीं करतीं?

लड़कियां इस कैम्पेन में पार्ट नहीं लेतीं –
thelallantop की रिपोर्ट के अनुसार, वैसे तो ‘नो शेव नवंबर’(#noshavenovember) एक जेंडर न्यूट्रल कैम्पेन है. लेकिन लड़के और लड़कियां दोनों इसमें पार्ट ले सकते हैं. पूरे महीने बॉडी हेयर शेव या ग्रूम ना कर के जो पैसे वो बचाते हैं वो डोनेट कर सकते हैं. इस कैम्पेन में पार्ट लेने वाले लोगों की तस्वीर अमूमन सोशल मीडिया पर दिख जाती है. #नोशेवनवंबर(#noshavenovember) इस हैशटैग के साथ लंबे-लंबे बाल या बढ़ी हुई दाढ़ी-मूछों वाले लड़कों की फोटो दिखना बहुत कॉमन है.पर इसी हैशटैग के साथ लड़कियों की फोटो हमे नहीं दिखती. बॉडी हेयर तो लड़कियों के भी होते हैं. मूछों के बाल यानी अपर-लिप हेयर तो लड़कियों में भी होते हैं. ज्यादातर लड़कियां भी हर महीने अपने बॉडी और चेहरे के बाल शेव या रिमूव तो करती ही हैं. फिर नवंबर के महीने में हमें बॉडी हेयर को एम्ब्रेस करती हुई लड़कियों की फोटो क्यों नहीं दिखती? कभी सोचा आपने?

पर क्या आपने कभी इस कैम्पेन में लड़कियों को पार्ट लेते देखा है? जहाँ तक बात करू मेरी तो मेने तो आज तक किसी लड़की को ऐसा करते नहीं देखा है. लोग आजकल कुछ भी डोनेट करते है तो उसे सोशल मीडिया पर शेयर करना जरुरी समझते है ताकि उनके इस काम की तारीफ की जाये. क्या अपने कभी किसी लड़की को बॉडी-हेयर को शो ऑफ करती हुई की फोटो देखी है?

लड़कों की मूछें, हाथ-पैर के बाल या छाती के बाल देखने की आदत हम सभी को है. इसलिए जब उनके बाल बढ़ भी जाते हैं तो हमें दिक्कत नहीं होती. बढ़े हुए दाढ़ी-बाल वाले लड़कों के लुक को ‘शैबी’ कह दिया जाता है.

लेकिन बात जब लड़कियों की आती है, तब यही बॉडी हेयर अन-हाइजीनिक या अन-फेमीनिन मान लिए जाते हैं. किसी लड़की के चेहरे पर बाल देखकर उसे अनकेम्पेट कहना कितना सामान्य है. उसके पैरों या अंडर आर्म्स के बाल लोगों को ऐसे चुभते हैं जैसे वो उन्होंने खुद से उगा लिए हों. आप कभी लड़कियों के ब्यूटी पार्लर चले जाइए. कभी कोई औरत कहती मिलेगी कि उसके ‘उनको’ तो उसके हाथ पैर चिकने ही पसंद हैं. या कोई लड़की बताती मिलेगी कि कैसे ऑफिस या कॉलेज में स्कर्ट पहनने पर उसका सिर्फ इसलिए मज़ाक बनाया गया कि उसके पैरों पर बाल थे. और पार्लर वाली दीदी वैक्स कराने को आपके पर्सनल हाईजीन से जोड़कर जो ज्ञान देती है वो अलग. दीदी, हाथ में बाल होते हैं न तो धूल ज्यादा चिपकती है. जर्म्स बालों में रह जाते हैं. जब लड़कियों के अपर लिप्स पर बाल आते हैं तो पूरी दुनिया बताने लग जाती है- अरे, तुम्हारी तो मूंछ आ रही है. ब्लीच करवा लो, हटवा लो… जैसी बातें.

वैसे एक ओपन सिक्रेट है. लड़कियां भी नो वैक्स विंटर मनाती हैं. जानते हैं क्यों? क्योंकि सर्दियों में उन्हें पूरे कपड़े पहनने होते हैं. तो न किसी को शरीर के बाल दिखते हैं और न कोई टोकता है. दूसरी वजह ये हैं सर्दियों में स्किन ड्राई हो जाती है और उसकी वजह से वैक्स करने पर दर्द बहुत होता है. मैं तो कहती हूं कि सिर्फ इसलिए खुद को वैक्स की तकलीफ देनी ही नहीं चाहिए कि कोई आपके बारे में क्या सोचेगा. सर्दी हो या कोई और मौसम, औरतों को सोशल प्रेशर में आए बिना तय करना चाहिए कि वो हेयर रिमूव करवाना चाहती भी हैं या नहीं. क्योंकि आप कुछ भी कर लें, लोग कुछ न कुछ तो कहेंगे ही.