Parents Day: अच्छे पेरेंट्स में औरतों का जो योगदान है वो ज्यादा महत्वपूर्ण…

Parents Day: आदर और सम्मान दीजिये, माता पिता अपने हो या ...

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Parents Day
Parents Day: आदर और सम्मान दीजिये, माता पिता अपने हो या दूसरों के, यही सिखाता यह दिवस...

Parents Day : 24 July 2022, यानि कि आज पेरेंट्स डे मनाया जा रहा है, हर साल जुलाई महीने के चौथे रविवार को पेरेंट्स डे मनाया जाता है। यह दिवस माता पिता का सम्मान और आदर करना सिखाता है , इस दिन बच्चे व बड़े सब माता पिता के प्रति प्यार व्यक्त करते है, हम अक्सर अपने पेरेंट्स से यह कभी नहीं कह पाते है कि हम उनसे कितना प्यार करते है. दरअशल, पेरेंट्स डे इसी लिए मनाया जाता है कि हम अपने पेरेंट्स को गिफ्ट देकर उनसे अपने दिल की बात कह सके, चलिए आज के आर्टिकल में हम यही जानते है की इस दिवस की शुरुआत कब और कहाँ से हुई, और एक बच्चे और माता पिता के जीवन में एक दूसरे की क्या भूमिका रहती है.

Parents Day
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कब और क्यों मनाया जाता है पेरेंट्स डे (Parents Day)? (When and why is Parents Day celebrated?)

Parents Day : हर साल जुलाई महीने के चौथे रविवार को पेरेंट्स डे मनाया जाता है। जिस तरह फादर्स डे, मदर्स डे मनाया जाता है वैसे ही नेशनल पेरेंट्स डे (Parents Day) मनाया जाता है. नेशनल पेरेंट्स डे (Parents Day) मनाने की शुरुआत पहली बार 8 मई, 1973 को दक्षिण कोरिया में हुई थी. दक्षिण कोरिया में हर साल 8 मई को मातृ और पितृ दिवस के बजाय पेरेंट्स डे (Parents Day) मनाया जाता है. साल 1994 में आधिकारिक रूप से पेरेंट्स डे मनाने की शुरुआत अमेरिका में हुई. इस साल पहली बार जुलाई महीने के चौथे रविवार को अमेरिका में पेरेंट्स डे मनाया गया. इसके बाद से हर साल राष्ट्रीय पेरेंट्स डे मनाया जाता है.

इस दिवस (Parents Day) को मनाने का मुख्य उद्देश्य माता-पिता के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करना है. इस दिन बच्चे अपने माता-पिता को गिफ्ट देकर उनको खुश करते हैं. आज के दिन बच्चे अपने-अपने तरीके से माता-पिता को खुश करने का प्रयास करते हैं. नेशनल पेरेंट्स डे (Parents Day) क्यों मनाया जाता है और इसको मनाने के क्या महत्व है आज हम इसके बारे में जानेंगे.

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मनुष्य के जीवन माता पिता का महत्व (Importance of parents in human life)

मनुष्य का जीवन अनेक उतार-चढ़ावों से होकर गुजरता है । उसकी नवजात शिशु अवस्था से लेकर विद्‌यार्थी जीवन, फिर गृहस्थ जीवन तत्पश्चात् मृत्यु तक वह अनेक प्रकार के अनुभवों से गुजरता है । अपने जीवन में वह अनेक प्रकार के कार्यों व उत्तरदायित्वों का निर्वाह करता है । परंतु अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्य व उत्तरदायित्वों को वह जीवन पर्यत नहीं चुका सकता है । माता-पिता से संतान को जो कुछ भी प्राप्त होता है वह अमूल्य है ।

माता व पिता दोनों बच्चे के जीवन में अहम् भूमिका निभाते है (Parents Day: Mother and father both play an important role in a child’s life.)

माँ की ममता व स्नेह तथा पिता का अनुशासन किसी भी मनुष्य के व्यक्तित्व निर्माण में सबसे प्रमुख भूमिका रखते हैं । किसी भी मनुष्य को उसके जन्म से लेकर उसे अपने पैरों तक खड़ा करने में माता-पिता को किन-किन कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ता है इसका वास्तविक अनुमान संभवत: स्वयं माता या पिता बनने के उपरांत ही लगाया जा सकता है ।

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माता-पिता सदैव पूजनीय होते है (Parents Day: parents are always respected)

हिंदू शास्त्रों व वेदों के अनुसार मनुष्य को 84 लाख योनियो के पश्चात् मानव शरीर प्राप्त होता है । इस दृष्टि से माता-पिता सदैव पूजनीय होते हैं जिनके कारण हमें यह दुर्लभ मानव शरीर की प्राप्ति हुई । आज संसार में यदि हमारा कुछ भी अस्तित्व है या हमारी इस जगत में कोई पहचान है तो उसका संपूर्ण श्रेय हमारे माता-पिता को ही जाता है । यही कारण है कि भारत के आदर्श पुरुषों में से एक राम ने माता-पिता के एक इशारे पर युवराज पद का मोह त्याग दिया और वन चले गए । कितने कष्टों को सहकर माता पुत्र को जन्म देती है, उसके पश्चात् अपने स्नेह रूपी अमृत से सींचकर उसे बड़ा करती है ।

सब कुछ सहते हुए एक बच्चे को बेहतर भविष्ये देते है पेरेंट्स (Parents give a better future to a child while suffering everything)

माता-पिता के स्नेह व दुलार से बालक उन संवेदनाओं को आत्मसात् करता है जिससे उसे मानसिक बल प्राप्त होता है । हमारी अनेक गलतियों व अपराधों को वे कष्ट सहते हुए भी क्षमा करते हैं और सदैव हमारे हितों को ध्यान में रखते हुए सद्‌मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करते हैं । पिता का अनुशासन हमें कुसंगति के मार्ग पर चलने से रोकता है एवं सदैव विकास व प्रगति के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है । यदि कोई डॉक्टर, इंजीनियर व उच्च पदों पर आसीन होता है तो उसके पीछे उसके माता-पिता का त्याग, बलिदान व उनकी प्रेरणा की शक्ति निहित होती है । यदि प्रांरभ से ही माता-पिता से उसे सही सीख व प्ररेणा नहीं मिली होती तो संभवत: समाज में उसे वह प्रतिष्ठा व सम्मान प्राप्त नहीं होता ।

मोदी जी के जीवन में भी माँ का रहा महत्वपूर्ण योगदान (Mother’s contribution was also important in Modi ji’s life.)

हम सब जानते है की हर इंसान की सफलता के पीछे उसके पेरेंट्स का अहम् योगदान रहता है, जैसे हम बात करे हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी की, मोदी जी की लाइफ में उनकी माँ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. जैसे मोदी जी का उनकी माँ के जन्मदिन पर अपने जीवन की दुःख भरी कहानी सुनाई ”वडनगर के जिस घर में हम लोग रहा करते थे वो बहुत ही छोटा था। उस घर में कोई खिड़की नहीं थी, कोई बाथरूम नहीं था, कोई शौचालय नहीं था। कुल मिलाकर मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत से बना वो एक-डेढ़ कमरे का ढांचा ही हमारा घर था, उसी में मां-पिताजी, हम सब भाई-बहन रहा करते थे।

उस छोटे से घर में मां को खाना बनाने में कुछ सहूलियत रहे इसलिए पिताजी ने घर में बांस की फट्टी और लकड़ी के पटरों की मदद से एक मचान जैसी बनवा दी थी। वही मचान हमारे घर की रसोई थी। मां उसी पर चढ़कर खाना बनाया करती थीं और हम लोग उसी पर बैठकर खाना खाया करते थे।

सामान्य रूप से जहां अभाव रहता है, वहां तनाव भी रहता है। मेरे माता-पिता की विशेषता रही कि अभाव के बीच भी उन्होंने घर में कभी तनाव को हावी नहीं होने दिया। दोनों ने ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियां साझा की हुईं थीं।

कोई भी मौसम हो, गर्मी हो, बारिश हो, पिताजी चार बजे भोर में घर से निकल जाया करते थे। आसपास के लोग पिताजी के कदमों की आवाज से जान जाते थे कि 4 बज गए हैं, दामोदर काका जा रहे हैं। घर से निकलकर मंदिर जाना, प्रभु दर्शन करना और फिर चाय की दुकान पर पहुंच जाना उनका नित्य कर्म रहता था।

मां भी समय की उतनी ही पाबंद थीं। उन्हें भी सुबह 4 बजे उठने की आदत थी। सुबह-सुबह ही वो बहुत सारे काम निपटा लिया करती थीं। गेहूं पीसना हो, बाजरा पीसना हो, चावल या दाल बीनना हो, सारे काम वो खुद करती थीं। काम करते हुए मां अपने कुछ पसंदीदा भजन या प्रभातियां गुनगुनाती रहती थीं। नरसी मेहता जी का एक प्रसिद्ध भजन है “जलकमल छांडी जाने बाला, स्वामी अमारो जागशे” वो उन्हें बहुत पसंद है। एक लोरी भी है, “शिवाजी नु हालरडु”, मां ये भी बहुत गुनगुनाती थीं।”

भगवान गणेश से लेकर श्रवण कुमार तक मातृ पिता भक्त (Mother father devotee from Lord Ganesh to Shravan Kumar)

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भारत की वेद पुराणों में अभिभावकों की महिमा का बहुत अच्छे से वर्णन किया गया है। यहां तक लिखा गया है कि भगवान गणेश जी ने अपनी मां बाप की परिक्रमा देकर सिद्ध कर दिया था इसीलिए आज के दिवस (Parents Day) को मनाने का मुख्य उद्देश्य माता-पिता के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करना है। इस दिन बच्चे अपने माता-पिता को गिफ्ट देकर उनको खुश करते हैं। आज के दिन बच्चे अपने-अपने तरीके से माता-पिता को खुश करने का प्रयास करते हैं,लेकिन भारत में अभिभावकों के पैर छू के उनको आलिंगन करके उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करके मनाया जाता है । जिस प्रकार से श्रवण कुमार ने अपने अंधे माँ व बाप को कंधे पर तीर्थ कराया था ।

हमारे विचार पेरेंट्स डे पर (Our thoughts on Parents Day)

माता पिता की तारीफ में हम जितने शब्द लिखे उतने ही काम है, जिस तरह पेरेंट्स और बच्चे के जीवन में सुंदरता के रंग भरी दुनिया दिखाई गई है, दरअशल इस दुनिया के विपरीत एक और बेरंग वाली दुनिया है, जिसमे हम और आप जैसे लोग रहते है. इस दुनिया में लोग माँ बाप को ऐसे छोड़ देते है जैसे कभी भी उनसे उनका कोई नाता ही न रहा हो, आजकल के माता पिता को बुजुर्ग अवस्था में लोग रोड पर छोड़ जाते है, उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ जाते है, क्या यह सही है ? , जिन कंधे पर बैठ कर एक व्यक्ति बच्चे से बड़ा हो जाता है, जब उन माता पिता को उसके बच्चो के कंधो की जरुरत पड़ने पर वो उन्हें क्यों अकेले छोड़ जाते है?

यह कोई कहानी नहीं हक़ीक़त है जो आज के समाज में हम और आप आये दिन देखते रहते है, लेकिन कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हमें यह लगता है उसके बच्चे ही उनके साथ इतना बुरा बरताऊ कर रहे है तो हम उन्हें क्यों रोके, आखिर हमारा क्या हक़ बनता है उनके बीच बोलने का. लेकिन आपका हक़ बनता है एक इंसानियत के नाते इस समाज को जरुरत है. आप जैसे अच्छे लोगों की, तो आदर कीजिये अपने और दूसरों के पेरेंट्स का. इज्जत दीजिये और इज्जत दिलवाइये उन सभी माता पिता को जिन्होंने आपका और हमारा कभी बुरा नहीं चाहा.

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पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया हम आशा करते है कि आज के आर्टिकल पेरेंट्स डे (Parents Day) से आपको जरूर कुछ सीखने को मिला होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो तो इसे शेयर करना ना भूले और ऐसे ही अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे THEHALFWORLD वेबसाइट के साथ चलिए मिलते है नेक्स्ट आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा, धन्यवाद !