NFHS-5: प्रधानमंत्री का नारा ‘बेटी बचाओ’ सफल, लेकिन ‘बेटी पढ़ाओ’ फेल, 41% महिलाएं जो 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकीं…

NFHS-5: प्रधानमंत्री का नारा 'बेटी बचाओ' सफल, लेकिन 'बेटी पढ़ाओ' फेल, 41% महिलाएं जो 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकीं...

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NFHS-5: प्रधानमंत्री का नारा 'बेटी बचाओ' सफल, लेकिन 'बेटी पढ़ाओ' फेल, 41% महिलाएं जो 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकीं...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2015 में हरियाणा से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया था. इसका मकसद ये था कि कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके और बेटियों को पढ़ाया जा सके. NFHS-5 के आंकड़ों से यह पता चला है कि बेटी बचाओ तो सफल हुआ है, लेकिन ‘बेटी पढ़ाओ’ फेल दिखाई दे रहा है. और ऐसा इस लिए है क्योंकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पहली बार महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा हुई है.

अगर इन आंकड़ों के मानें तो देश में अब हर 1000 पुरुषों पर 1,020 महिलाएं हैं. अगर बात करे 2015-16 में हुए सर्वे की तो NFHS-4 में ये आंकड़ा हर 1,000 पुरुषों पर 991 महिलाओं का था.यानि कि जेंडर रेश्यो 2015-16 के मुकाबले 10 अंक सुधरा है। हालाँकि सेक्स रेशियो में सुधार शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा बेहतर हुआ है. गांवों में हर 1,000 पुरुषों पर 1,037 महिलाएं हैं, जबकि शहरों में 985 महिलाएं हैं.

महिलाओं की संख्या बढ़ी लेकिन स्थिति बेहतर नहीं –
NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार भले ही प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या बढ़ गई हो, लेकिन अभी भी उनकी स्थिति बहुत बेहतर नहीं हुई है. NFHS-5 सर्वे के मुताबिक 71.5% महिलाएं ही साक्षर हैं. NFHS-5 के ही आंकड़े ये भी बताते हैं कि आज भी देश में 41% महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्हें 10 साल से ज्यादा स्कूली शिक्षा मिली है. यानी 59% महिलाएं 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकीं हैं. ग्रामीण इलाकों में तो 33.7% महिलाएं ही 10वीं से आगे पढ़ सकीं हैं.

शहर और गांव में बड़ा अंतर ( आंकड़े दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार )

आंकड़े जो महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाते हो –

  • आज भी सिर्फ 33.3% महिलाओं तक ही इंटरनेट की पहुंच है. केवल 54% महिलाओं के पास ही अपना फोन है.
  • 18 से 49 साल की 3.1% महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक हिंसा को झेला है.
  • 18 से 49 साल की 29.3% महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी न कभी पति की प्रताड़ना झेली है.
  • 20 से 24 साल की 23.3% महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी 18 साल से पहले हो गई थी.

महिलाओं के हक़ में सुधर के आंकड़े…

  • 43.3% महिलाओं के नाम पर कोई न कोई प्रॉपर्टी है, जबकि 2015-16 में ये आंकड़ा 38.4% था.
  • 78.6% महिलाओं के पास अपना बैंक अकाउंट है. 2015-16 में ऐसी 53% महिलाएं ही थीं.