शारीरिक संबंध के बाद शादी से मना करना धोखाधड़ी नहीं… Bombay High Court.

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने एक तुवाक को बलात्कार और धोखाधड़ी के मामले में यह कहते हुए बरी कर दिया कि 'तथ्यों से ये साबित नहीं होता कि युवक ने उसे धोखे में रखा था। न ही ये साबित होता है कि महिला को युवक ने गलत जानकारी दी और उससे संबंध बनाए। ऐसे में लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी से मना करने को धोखा नहीं कहा जा सकता है।

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Bombay High Court
शारीरिक संबंध के बाद शादी से मना करना धोखाधड़ी नहीं... Bombay High Court.

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने एक तुवाक को बलात्कार और धोखाधड़ी के मामले में यह कहते हुए बरी कर दिया कि ‘तथ्यों से ये साबित नहीं होता कि युवक ने उसे धोखे में रखा था। न ही ये साबित होता है कि महिला को युवक ने गलत जानकारी दी और उससे संबंध बनाए। ऐसे में लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी से मना करने को धोखा नहीं कहा जा सकता है।

पत्रिका कि रिपोर्ट के अनुसार Bombay High Court का कहना था कि यदि पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध (Physical Relation) में रह रहे हो और उसने शादी से मना कर दिया है तो आप इसे धोखा नहीं कह सकते। ये बात बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने अपने के फैसले में कहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के एक निर्णय को पलटते हुए दोषी ठहराए गए युवक को बरी कर दिया है।

क्या था पूरा मामला –
पालघर में रहने वाले काशीनाथ घरात नाम के एक युवक पर बलात्कार और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया गया था, यह शिकायत उसकी गर्लफ्रेंड ने दर्ज कराई थी। पुलिस ने धारा 376 और 417 के तहत बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज भी कर लिया। अपनी शिकायत में काशीनाथ घरात की गर्लफ्रेंड ने आरोप लगाया था कि उसने पहले शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में वो अपने वादे से मुकर गया। दोनों के बीच ये संबंध तीन साल तक रहे थे। युवती की शिकायत पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने वादा कर संबंध बनाने और फिर वादे से मुकर जाने के आरोप में एक साल की सजा भी सुना दी थी।

Bombay High Court का खटखटाया दरवाजा –
निचली अदालत से सजा पाने के बाद आरोप युवक ने हाई कोर्ट (Bombay High Court) का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को पलटते हुए युवक को बरी कर दिया है। इस मामले की सुनवाई अनुजा प्रभुदेसाई की सिंगल बेंच कर रही थी।

क्या कहा Bombay High Court –
हाई कोर्ट जस्टिस प्रभुसेदाई ने कहा कि ‘तथ्यों को देखने पर पता चलता है कि महिला और आरोपी तीन वर्ष तक फिज़िकल रिलेशन में थे। कोर्ट ने आगे कहा कि ‘तथ्यों से ये साबित नहीं होता कि युवक ने उसे धोखे में रखा था। न ही ये साबित होता है कि महिला को युवक ने गलत जानकारी दी और उससे संबंध बनाए। ऐसे में लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी से मना करने को धोखा नहीं कहा जा सकता है।’

हालाँकि मामले में जस्टिस प्रभुसेदाई ने ये भी कहा कि ‘इस तरह के मामलों में यदि ये साबित होता है कि युवक ने महिला को गलत जानकारी देकर संबंध बनाए तब युवक के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है।’