तीन तलाक़ बिल राज्यसभा में पास, अपराधी को तीन साल तक की सजा-जानिए …

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तलाक़ बिल Triple Talaq

पिछले दिनों चर्चा में रहने वाला तीन तलाक़ बिल (Triple Talaq) आखिरकार राज्यसभा में पास हो ही गया है। इससे पहले भी यह दो बार राज्यसभा में असफल रहा। मुस्लिम महिलाओं को कानूनी रूप से इससे बहुत सहायता मिलने वाली है क्योंकि इस बिल में उनके संरक्षण की बात हुई है।

तीन तलाक़ (Triple Talaq) पर वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 और विरोध में सिर्फ 84 वोट पड़े। अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया था। इसके बाद 2 साल में यह बिल 2 बार लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में अटक गया। आम चुनाव के बाद तीसरी बार यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ। 5 दिन बाद ही यह राज्यसभा से भी पास हो गया। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

3 साल की सजा के प्रावधान
तीन तलाक़ बिल में 3 साल की सजा के प्रावधान का कांग्रेस ने विरोध किया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 3 साल की सजा का प्रावधान ठीक उसी तरह है, जैसे किसी को अपमानित करने या धमकाने के जुर्म में जेल भेज दिया जाए। इसलिए हम इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहते थे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।
सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया था।
विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान भी हो।
इसके बाद सरकार सितंबर 2018 में अध्यादेश लेकर आई। इसमें विपक्ष की मांग काे ध्यान में रखते हुए जमानत का प्रावधान भी जोड़ा गया। अध्यादेश में कहा गया कि तीन तलाक देने पर तीन साल की जेल होगी।

मोदी ने कहा- पूरे देश के लिए ऐतिहासिक दिन
उधर राज्यसभा में तीन तलाक (Triple Talaq) बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरे देश के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई। उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला। सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है। इस ऐतिहासिक मौके पर मैं भी सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं।

यह बिल मुस्लिम महिलाओं के लिए विवाह अधिनियम की तरह काम करेगा इससे पहले हिन्दू महिलाओं के लिए भी हिन्दू कोड बिल संसद में रखा गया था परन्तु उस बिल को भी विरोध का सामान करना पड़ा था उसके बाद बिल को अलग अलग टुकड़ों में अलग अलग नाम से पास किया गया।