महाराष्ट्र में शक्ति बिल पास, रेपिस्ट को फांसी, एसिड अटैक पर 10 लाख जुर्माना…

महाराष्ट्र में शक्ति बिल पास, रेपिस्ट को फांसी, एसिड अटैक पर 10 लाख जुर्माना...

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शक्ति बिल
महाराष्ट्र में शक्ति बिल पास, रेपिस्ट को फांसी, एसिड अटैक पर 10 लाख जुर्माना...

बिल 23 दिसंबर को शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) बिल महाराष्ट्र विधानसभा में पास हो गया. इस बिल में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सज़ा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. इसके साथ ही ये बिल मामलों के फास्ट ट्रैक निपटारे की भी बात करता है. इस बिल में रेप के गंभीर मामलों में फांसी की सज़ा का भी प्रावधान है. अब ये बिल महाराष्ट्र की विधान परिषद में पेश किया जाएगा. दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद, इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा.

क्या है नए प्रावधान बिल में ?
– किसी को केवल अपमानित करने, जबरन वसूली, धमकी देने, बदनाम करने या परेशान करने के इरादे से झूठी शिकायत करना या झूठी जानकारी देना दंडनीय अपराध होगा. इसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों भोगने पड़ सकते हैं.
– एसिड अटैक के मामलों में, पीड़ित की प्लास्टिक सर्जरी और इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा.
– किसी आरोपी के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल होने के 30 दिनों के अंदर ट्रायल पूरा करना होगा.
– उच्च न्यायालय में दायर एक अपील को 45 दिनों के भीतर निपटाना होगा. इसके लिए विशेष अदालतें स्थापित की जा सकती हैं.
– बलात्कार, सामूहिक बलात्कार के गंभीर मामलों में या नाबालिगों के साथ गंभीर यौन हमलों के मामलों में सज़ा-ए-मौत.
– दोषी पाए जाने वालों पर 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. मौजूदा कानून में जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन अधिकांश धाराओं में ये साफ नहीं था कि कितने का जुर्माना लगाया जाएगा.
– ऐसे मामलों में FIR दर्ज होने के बाद 15 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश है, जिसे केवल सात दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है. अगर इस समय में जांच पूरी नहीं हुई तो जांच अधिकारी पर कार्रवाई होगी.
– उच्च न्यायालय में दायर एक अपील को 45 दिनों के भीतर निपटाना होगा. इसके लिए विशेष अदालतें स्थापित की जा सकती हैं.

राज्य सरकारें केंद्र के इतर कानून बना सकती हैं?
आपराधिक क़ानून संविधान की कन्करेंट लिस्ट में आता है. मतलब ये कि केंद्र और राज्य, दोनों आपराधिक क़ानून पारित कर सकते हैं. राज्यों की तरफ से जोड़े गए प्रावधान उस राज्य में हुई घटनाओं पर लागू होते हैं. दिसंबर, 2019 में आंध्र प्रदेश में दिशा ऐक्ट पारित किया गया था. एक मेडिकल स्टूडेंट को रेप के बाद जलाकर मार दिया गया था, उस घटना के बाद आंध्र प्रदेश में रेप के खिलाफ कड़े कानून की मांग तेज़ हुई थी, जिसके बाद वहां की सरकार ने दिशा एक्ट पास किया था.
बच्ची ने अपनी मां को बताया कि आरोपी की तोंद निकली हुई है और वह उसे पहचान सकती है.

रेप को लेकर नए कानून –
दिसंबर, 2012 में दिल्ली गैंगरेप और मर्डर केस के बाद देश में रेप के खिलाफ बने कानूनों को और मजबूत बनाने की मांग तेज़ हुई. साल 2013 में क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट पास हुआ. इसमें रेप के ऐसे मामलों में रेपिस्ट को फांसी की सज़ा देने का प्रावधान है जिसमें विक्टिम के साथ हुई बर्बरता के चलते उसकी मौत हो गई हो या फिर बर्बरता की वजह से विक्टिम का शरीर विक्षिप्त हो गया हो. वहीं, साल 2018 में क्रिमिनल लॉ में एक बार फिर संशोधन किया गया. जिसके बाद कानून में 12 या उससे कम उम्र की किसी भी बच्ची के साथ रेप या गैंगरेप करने पर आरोपी या आरोपियों को फांसी की सज़ा देने का प्रावधान जुड़ा.

महिलाओं से जुड़े ऑनलाइन अपराधों को लेकर नया कानून –
thelallantop की रिपोर्ट के अनुसार शक्ति विधेयक में किसी भी माध्यम से महिलाओं के उत्पीड़न से निपटने के लिए CrPC में एक नई धारा जोड़ने का प्रस्ताव है.

टेलीफोन, ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मोड से कोई भी “ऑफ़ेंसिव मैसेज” अधिनियम के तहत दंडनीय होगा. अगर कोई मेसेज ख़तरनाक, अलार्मिंग या कामुक प्रकृति का है, तो ऐक्ट के तहत दंडनीय है. ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम 5 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा.

किसी भी महिला को धमकी देकर रोमांटिक जवाब देने के लिए मजबूर करने पर भी सज़ा है. पहली बार दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ तीन साल तक की क़ैद और बाद के मामलों में पांच लाख रुपये के जुर्माने के साथ पांच साल तक की कैद हो सकती है.

शक्ति विधेयक IPC और CrPC के मौजूदा मामलों के मुकाबले तो सख्त कानून की मांग करता है. लेकिन जब बात ऑनलाइन अपराधों की आती है तो हम पाते हैं कि शक्ति बिल में प्रस्तावित सज़ा की तुलना में मौजूदा IT एक्ट ज्यादा सख्त है.

IT एक्ट की धारा 67-ए और 67-बी के तहत यौन सामग्री (बच्चों को शामिल करने वाले सहित) को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रसारित करने की सज़ा पांच से सात साल तक की जेल है. जबकि शक्ति विधेयक में इसे घटाकर एक से दो साल कर दिया गया है.