Sakshi Malik: बस कंडक्टर पिता की बेटी ”साक्षी मलिक” ने कैसे एक ही दांव में जीत लिया गोल्ड मैडल ?

Sakshi Malik भारत की जानी मानी स्पोर्ट स्टार हैं। साक्षी का जन्म 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक में हुआ। पिता श्री सुखबीर मलिक डीटीसी में बस कंडक्टर हैं

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Sakshi Malik
Sakshi Malik बस कंडक्टर पिता की बेटी ''साक्षी मलिक'' ने एक ही दांव में जिता दिया गोल्ड मेडल...

India at CWG 2022: ”हमारी छोरिया किसी से काम है के” दंगल फिल्म के इस डायलॉग को हमारे देश की लड़कियों ने या महिलाओं ने कभी गलत महसूस नहीं होने दिया, जी हाँ आपको बता दे कि बर्मिंघम में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है. आज हम आपको बताने जा रहे है एक ही दांव में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाली साक्षी मलिक (Sakshi Malik) के बारे में.

Sakshi Malik
Sakshi Malik

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के आठवें दिन (5 अगस्त) भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड समेत छह मेडल हासिल किए. खास बात यह है कि ये सभी छह मेडल रेसलिंग में आए. इस दौरान महिल रेसलर साक्षी मलिक (Sakshi Malik) भी गोल्ड जीतने में कामयाब रहीं. साक्षी मलिक ने वूमेन्स 62 किलो भारवर्ग के फाइनल में कनाडा की एना गोडिनेज गोंजालेज को बाय फॉल के जरिए 4-4 से मात दी.

एक ही दांव ने जिता दिया गोल्ड मेडल One bet won the gold medal

aajtak की रिपोर्ट के अनुसार पहले राउंड में साक्षी (Sakshi Malik) के खिलाफ एना गोंजालेज ने दो बार टेक डाउन के जरिए दो-दो प्वाइंट हासिल करते 4-0 की बढ़त ले ली थी. ऐसे में लग रहा था कि मुकाबला साक्षी मलिक के हाथ से निकल सकता है. लेकिन 29 साल की साक्षी ने दूसरे हाफ की शुरुआत में ही और टेकडाउन से दो अंक लिए और फिर बेहतरीन दांव लगाते हुए कनाडाई खिलाड़ी को पिन कर गोल्ड मेडल जीत लिया.

बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक Bajrang Punia and Sakshi Malik

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गोल्ड जीतने के बाद साक्षी मलिक (Sakshi Malik) अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं और पोडियो पर मेडल सेरमनी के दौरान उनकी आंखें नम थीं. यह साक्षी मलिक का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक है. इससे पहले वह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और कांस्य पदक जीत चुकी हैं. साक्षी मलिक ने क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की केल्सी बार्न्स और सेमीफाइनल में कैमरून की एटेन नोगोले 10-0 से शिकस्त देकर फाइनल का टिकट हासिल किया था.

कौन हैं साक्षी मलिक? Who is Sakshi Malik?

साक्षी मलिक (Sakshi Malik) भारत की जानी मानी स्पोर्ट स्टार हैं। जिनके बारे में सभी लगभग सभी जानते हैं। सक्षी का जन्म 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक में हुआ। उनके पिता श्री सुखबीर मलिक डीटीसी में बस कंडक्टर हैं और उनकी माता श्रीमती सुदेश मलिक एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। जाटों के परिवार से आने वाली साक्षी बचपन से ही पहलवानी में दिलचस्पी रखती थीं, यही वजह थी कि उन्होंने इसे ही बतौर करियर चुना।

साक्षी मलिक जीवन परिचय sakshi malik biography

1पूरा नामसाक्षी मलिक
2जन्म3 सितम्बर 1992
3जन्म स्थानमोखरा गाँव, रोहतक जिला, हरियाणा
4माता-पितासुदेश मलिक – सुखवीर
5भाईसचिन मलिक
6कोचईश्वर दाहिया
7प्रोफेशनफ्रीस्टाइल रेसलिंग
8हाईट162 cm
9वजन64 kg
10रेसलिंग केटेगरी58 कग

रेलवे में मिली नौकरी job in railway

खेल जगत में बेहतर प्रदर्शन के लिए साक्षी (Sakshi Malik) को भारतीय रेलवे के वाणिज्य विभाग में नौकरी मिल गई, इसके अलावा वो JSW स्पोर्ट्स एक्सीलेंस प्रोग्राम का हिस्सा हैं

पहलवान खिलाड़ी से की शादी married to wrestler

रियो ओलंपिक में इतिहास रचने के बाद साल 2017 में पहलवान खिलाड़ी सत्यव्रत कादियान से शादी कर ली। साक्षी (Sakshi Malik) के पति भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ और राष्ट्रीय खेलों में कई पदक जीते हैं।

तो ये थी साक्षी मलिक (Sakshi Malik) की कहानी, आपको हमारा यह लेख अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

साक्षी मलिक करियर Sakshi Malik career history

साक्षी ने 12 साल में ट्रेनिंग शुरू की और फिर देश के बहुत से इवेंट में हिस्सा लेकर विजयी रही. अन्तराष्ट्रीय तौर पर साक्षी (Sakshi Malik) ने अपने जीवन का पहला खेल 2010 में जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशीप में खेला था. यहाँ उन्होंने 58 किलोग्राम केटेगरी में ब्रोंज मैडल जीता था.

इसके बाद 2014 में साक्षी (Sakshi Malik) को अन्तराष्ट्रीय तौर पर पहचान मिली, जब उन्होंने डेव इंटरनेशनल रेसलिंग टूर्नामेंट में 60 किलोग्राम केटेगरी में गोल्ड मैडल जीता था.

2014 में ही ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में साक्षी (Sakshi Malik) ने क्वार्टर फाइनल जीता था, इसके बाद सेमीफाइनल में कैनेडा से 3-1 से विजयी रही. साक्षी का फाइनल मैच नाइजीरिया की एमिनेट से था, जिसे वे हार गई. यहाँ साक्षी को सिल्वर मैडल मिला.

इसके बाद सितम्बर 2014 में ताशकेंट में वर्ल्ड चैम्पियनशीप मुकाबला हुआ. यहाँ साक्षी (Sakshi Malik) क्वार्टरफाइनल से ही बाहर हो गई थी, लेकिन सामने वाली टीम से साथ 16 राउंड तक वे लड़ती रहीं.

2015 में दोहा में एशियन चैम्पियनशीप हुई, इसमें 60 किलोग्राम के 5 राउंड हुए थे. यहाँ साक्षी ने 2 राउंड जीत कर तीसरा नंबर हासिल किया था और ब्रोंज मैडल जीता था.

रियो ओलंपिक में रचा इतिहास History created in Rio Olympics

साल 2016 में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुए समर ओलंपिक में साक्षी मलिक ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इसी के साथ वो भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। रियो ओलंपिक से जीतकर आने के बाद देश भर में साक्षी (Sakshi Malik) की खूब वाहवाही हुई। खास बात यह है कि साक्षी खेल में बैकअप खिलाड़ी के तौर पर थीं। उनकी जगह प्रतियोगिता में पहलवान गीता फोगाट जाने वाली थीं, लेकिन अचानक गीता के खराब खेल प्रदर्शन के चलते यह मौका साक्षी को मिला।

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पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया हम आशा करते है कि आज के आर्टिकल साक्षी मलिक (Sakshi Malik) से जरूर कुछ सीखने को मिला होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे शेयर करना ना भूले और ऐसे ही अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे THEHALFWORLD वेबसाइट के साथ चलिए मिलते है नेक्स्ट आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा, धन्यवाद !