क्या है ‘राइट टू सिट’ (Right to sit) यानि ‘बैठने का अधिकार’?, महिलाओं के लिए क्यों है खास…

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Right to Sit
Right to Sit

जरा सोचिये यदि आपके बैठने के अधिकार के लिए भी कानून बनाना पड़े तो कैसा लगेगा क्योंकि ऐसा ही देखने को मिल रहा है तमिलनाडु में जहाँ सरकार ‘राइट टू सिट’ (Right to sit) का कानून लाने जा रही है.

हम अपने आस पास के मार्केट में जाते है तो हमे देखने को मिलता है की सभी प्रकार दुकानों पर काम कर रही महिलायें या पुरुष अक्षर खड़े ही नजर आते हैं यह एक कानून है उनके लिए जिसके आधार पर यह लोग काम करते समय बैठ नहीं सकते. खास तौर से देखा जाये तो ज्वैलरी शॉप, साड़ी की दुकान, चूड़ियों की दुकान आदि पर देखने को मिलता है. मुख्य रूप से यहाँ महिलायें ही ज्यादा देखने को मिलती है जिनको ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है इन्हे लगातार 8-10 घंटे खड़े होकर काम करने व समय पर खाना व पानी नहीं पीने की वजह से बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं.

’सोमवार 6 सितम्बर को तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में औपचारिक रूप से एक विधेयक पेश किया. इस विधेयक के अनुसार दुकानों और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को ‘बैठने का अधिकार’ देने की बात कही गई है. सीवी गणेशन ( तमिलनाडु के श्रम एवं रोजगार मंत्री) ने ‘राइट टू सिट’ (Right to sit) बिल पेश किया. राज्य कर्मचारी संघ और अन्य संगठनों की ओर से इस पहल का स्वागत किया गया है.

आपको बता दे की कुछ साल पहले केरल में दुकानों और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम कर रहे कर्मचारियों द्वारा ‘बैठने के अधिकार’ की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए गए थे, जिसके बाद वहां की सरकार ने उनके लिए बैठने की व्यवस्था प्रदान करने के लिए 2018 में केरल दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन किया था.

तमिलनाडु दुकान और प्रतिष्ठान (संशोधन) अधिनियम 2021, केरल के एक विधेयक से प्रेरित है. वहां साल 2018 में पहली बार ऐसा ही बिल पेश किया गया था. जिसके बाद जनवरी 2019 में ये कानून बना दिता गया. केरल में साल 2016 से ही महिलाएं और अन्य कर्मचारी ‘राइट टू सिट’ (Right to sit) की मांग कर रहे थे. अब तमिलनाडु में भी ऐसा ही बिल लाया गया है.

तमिलनाडु में कर्मचारियों को बैठने की सुविधा प्रदान करने का विषय 4 सितंबर 2019 को आयोजित राज्य श्रम सलाहकार बोर्ड की बैठक में रखा गया था. तब बोर्ड के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से इसे अप्रूव किया गया था.
अधिनियम की प्रस्तावित धारा 22-ए में कहा गया है कि हर प्रतिष्ठान के परिसर में सभी कर्मचारियों के लिए बैठने की उपयुक्त व्यवस्था होनी अति आवश्यक है. जिस से कर्मचारी काम करते वक्त थकान या बीमार होने कि सम्भावना कम हो.

ये विधेयक तमिलनाडु दुकानों एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 1947 में संशोधन की सिफारिश करता है. पुराने बिल में एक सब सेक्शन जोड़ते हुए बिल कहता है, कि “सभी दुकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठान पर सभी कर्मचारियों के बैठने के लिए उचित इंतजाम किए जाएंगे. ताकि ड्यूटी के दौरान पूरे समय उन्हें खड़ा नहीं रहना पड़े. और काम के वक्त उन्हें बैठने का मौका मिले ”

ये कानून पास होने के बाद अन्य राज्यों में भी यह मांग उठ सकती है क्योंकि वहां काम करने वाली महिलाओं को जब पूरे-पूरे दिन खड़ा रहना पड़ता है और उनके वॉशरूम जाने की व्यवस्थित जगह नहीं होने के कारण उनको कई तरह की बीमारियां हो जाती है परन्तु अभी तक ज्यादातर राज्य सरकारों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया है.