Rani Chennamma: यह थीं कर्नाटक की ‘लक्ष्मीबाई’, तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्ध कलाओं की योद्धा…

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Rani Chennamma
Rani Chennamma यह थीं कर्नाटक की 'लक्ष्मीबाई', तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्ध कलाओं की योद्धा...

इतिहास में बहुत से पुरुष योद्धा हुए और बहुत सी महिला योद्धा, भारतीय इतिहास इतना गहरा दबा हुआ है जहाँ तक हम शायद ही पहुँच पायें, हमारे देश का इतिहास वीरों और योद्धाओं की गाथाओं से भरा पड़ा है, हमारी कोशिश यही रहती है कि हम आपको इतिहास के दबे पन्नों से हर एक दबे योद्धाओं से रूबरू करवायें, आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे रानी चेन्नम्मा (Rani Chennamma) की. जिनकी वीरता सौंदर्यता पर राजा मल्लसर्ज मंत्रमुग्ध हो गए थे.

Rani Chennamma
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बचपन और युद्धकौशल (childhood and warfare)

रानी चेन्नम्मा (Rani Chennamma) का जन्म कर्नाटक के बेलगाम में 23 अक्टूबर, 1778 को हुआ. बचपन से ही चेन्नम्मा को तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्ध कलाओं का शौक था. राजपरिवार में जन्म होने के कारण चेन्नम्मा को अपने इन शौकों को पूरा करने का मौका भी मिला. उन्होंने इतनी शिद्दत से इन कलाओं को सिखा की, युवा होते—होते अपने युद्धकौशल की वजह से वह प्रसिद्ध हो गई.

कित्तूर रानी (Rani Chennamma) चेन्नम्मा जीवन परिचय (Kittur Rani Chennamma Biography)

पूरा नाम चेन्नम्मा
जन्म स्थान२३ अक्तूबर १७७८
जन्म काकती,बेलगाव(मैसूर)
धर्महिन्दू
पिता का नामधूलप्पा देसाई
माता का नामपद्मावती
पति का नाम कित्तूर के राजा मल्लसर्ज
संतान१ पुत्र
मृत्यु तारीख२१ फरवरी, १८२९
मृत्यु स्थानबेलहोंगल, कर्नाटक
उम्र ५० वर्ष
मृत्यु की वजहअंग्रेज़ो द्वारा बंदी बनाया जाना
भाषाकन्नड़, उर्दू, मराठी और संस्कृ

रानी चेन्नम्मा (Rani Chennamma) की शादी की रोचक कहानी (Interesting story of Rani Chennamma’s marriage)

कर्नाटक प्रांत के छोटा कस्बा कित्तूर धारवाड़ और बेलगांव के बीच में बसा है। चेन्नम्मा (Rani Chennamma) घुड़सवारी, तलवारबाजी, तीरंदाजी जैसे परंपरागत खेलों में पारंगत थी। जब चैन्नम्मा किशोरावस्था में थी उसी समय बेलगाम में एक नरभक्षी बाघ का आतंक छा गया। कित्तूर के राजा मल्लसर्ज ने बाघ को मारने के लिए बेलगाम में आखेट पर गये। उन्होंने बाघ पर बाण चलाया। बाण लगते ही वह वहीं गिर पड़ा। बाघ के गिरने के बाद राजा मल्लसर्ज बाघ को देखने बाघ के पास गये। लेकिन मल्लसर्ज बाघ में दो तीर लगे देख कर चौंक गये। उन्होंने तो एक ही बाण चलाया था पर ये दूसरा तीर किसका है। तभी उनकी नजर सैनिक वेशभूषा में सजी एक सुंदर कन्या पर पड़ी, राजा को समझते देर न लगी कि दूसरा बाण किसका है। राजा मल्लसर्ज रानी (Rani Chennamma) की वीरता सौंदर्यता पर मंत्रमुग्ध हो गए। इस घटना के बाद चेन्नम्मा की शादी कित्तूर राजा मल्लसर्ज से हुआ।

Rani Chennamma
Rani Chennamma

रानी चेन्नम्मा के पति पुत्र की मृत्यु (Queen Chennamma’s husband son died)

रानी चेन्नम्मा ओर राजा मल्लासर्ज के विवाह के कुछ समय सुख से बीते लेकिन इसके बाद चेन्नम्मा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. राजा मल्लासर्ज मृत्यु को प्राप्त हो गए. कुछ सयम बाद रानी चेन्नम्मा के पुत्र का भी देहांत हो गया. ऐसे में राज्य के सामने राजा के पद का संकट खड़ा हो गया. कित्तुर की राजगद्दी रिक्त हो गई थी. जिसे भरने के लिए रानी चेन्नम्मा ने एक पुत्र गोद लिया.

रानी चेन्नम्मा का अंग्रेजों से मुकाबला (Rani Chennamma’s fight with the British)

अक्टूबर 1824 को अंग्रेजों ने 20,000 सिहापियों और 400 बंदूकों के साथ कित्तुरु पर हमला कर दिया। उस लड़ाई में ब्रिटिश सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कलेक्टर और अंग्रेजों का एजेंट सेंट जॉन ठाकरे कित्तुरु की सेना के हाथों मारा गया। चेन्नम्मा के सहयोगी अमातूर बेलप्पा ने उसे मार गिराया था और ब्रिटिश सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था। दो ब्रिटिश अधिकारियों सर वॉल्टर एलियट और स्टीवेंसन को बंधक बना लिया गया।

इस युद्ध के बाद अंग्रेजों ने वादा किया कि अब युद्ध नहीं करेंगे तो रानी चेन्नम्मा ने ब्रिटिश अधिकारियों को रिहा कर दिया। लेकिन अंग्रेजों ने धोखा दिया और फिर से युद्ध छेड़ दिया। इस बार ब्रिटिश अफसर चैपलिन ने पहले से भी ज्यादा सिपाहियों के साथ हमला किया। सर थॉमस मुनरो का भतीजा और सोलापुर का सब कलेक्टर मुनरो मारा गया। रानी चेन्नम्मा अपने सहयोगियों संगोल्ली रयन्ना और गुरुसिदप्पा के साथ जोरदार तरीके से लड़ीं। लेकिन अंग्रेजों के मुकाबले कम सैनिक होने के कारण वह हार गईं। उनको बेलहोंगल के किले में कैद कर दिया गया। वहीं 21 फरवरी 1829 को उनकी मौत हो गई।

जंग हारी लेकिन इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गई (Lost the battle but immortalized forever in the pages of history0

भले ही चेन्नम्मा (Rani Chennamma) आखिरी लड़ाई में हार गईं लेकिन उनकी वीरता को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी पहली जीत और विरासत का जश्न अब भी मनाया जाता है। हर साल कित्तुरु में 22 से 24 अक्टूबर तक कित्तुरु उत्सव लगता है जिसमें उनकी जीत का जश्न मनाया जाता है। रानी चेन्नम्मा को बेलहोंगल तालुका में दफनाया गया है। उनकी समाधि एक छोटे से पार्क में है जिसकी देखरेख सरकार के जिम्मे है।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा के स्मारक (Monument to Kittur Rani Chennamma)

रानी चेन्नम्मा (Rani Chennamma) को बैलहोंगल में दफनाया गया था, जो अब समाधि के स्मारक के रूप में कार्य करता है। पूर्व भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी 11 सितंबर, 2007 को भारतीय संसद परिसर में कित्तूर रानी चेन्नम्मा के स्मारक का उद्घाटन किया।

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पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया हम आशा करते है कि आज के आर्टिकल रानी चेन्नम्मा (Rani Chennamma) से आपको जरूर कुछ सीखने को मिला होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो तो इसे शेयर करना ना भूले और ऐसे ही अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे THEHALFWORLD वेबसाइट के साथ चलिए मिलते है नेक्स्ट आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा, धन्यवाद !