महाराष्ट्र की ‘मदर टेरेसा’ Sindhutai Sapkal का निधन, सम्पूर्ण जीवन अनाथ बच्चों की सेवा में गुजरा…

महाराष्ट्र की 'मदर टेरेसा' (Sindhutai Sapkal) का निधन, सम्पूर्ण जीवन अनाथ बच्चों की सेवा में गुजरा...

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Sindhutai Sapkal
Sindhutai Sapkal

मंगलवार को 74 वर्ष की आयु में सिंधुताई सपकाल (Sindhutai Sapkal) का निधन हो गया। उनको प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया जा चूका है. वैसे वह पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थीं और दिल का दौरा पड़ने की वजह से मंगलवार को उनकी मौत हो गई।

कौन हैं सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal)?
अगर आप नहीं जानते तो आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे कि सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) का जन्म महाराष्ट्र के वर्धा जिले के चरवाहे परिवार में हुआ है। उनका बचपन बहुत सारे कष्टों के बीच वर्धा बीता। जब सिंधु नौ साल की थीं तो उनकी शादी एक बड़े उम्र के व्यक्ति से कर दी गई थी। सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) ने केवल चौथी क्लास तक पढ़ाई की थी, वह आगे भी पढ़ना चाहती थीं लेकिन शादी के बाद ससुराल वालों ने उनके इस सपने को पूरा नहीं होने दिया।

महाराष्ट्र की ‘मदर टेरेसा’ –
वैसे आपको बता दे कि सिंधुताई (Sindhutai Sapkal) को महाराष्ट्र की ‘मदर टेरेसा’ भी कहा जाता है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन अनाथ बच्चों की सेवा में गुजार दी। लगभग 1400 अनाथ बच्चों को गोद लिया और इस नेक काम के लिए उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री समेत कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

ससुराल और मायके में नहीं मिली जगह –
कठिनाई भरे बचपन के बाद शादीशुदा जीवन में भी उन्हें सुख नहीं मिला, पढ़ाई से लेकर ऐसे कई छोटे-बड़े मामले आए, जिसमें सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) को हमेशा अन्याय का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई लेकिन अंजाम ये हुआ कि जब वह गर्भवती थीं तो ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया। इतना ही नहीं उनके मायके वालों ने भी अपने यहा रखने से मना कर दिया।

अकेले बच्ची को जन्म दे पत्थर से काटा गर्भनाल –
गर्भावस्था में संघर्ष के बीच उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। अकेले एक बच्चे को जन्म देना व उसे पलना आसान नहीं था। अपने गर्भनाल को उन्होंने पत्थर से मार-मार कर काटा था। इसके बाद सिंधु मे अपनी बेटी के लिए रेलवे स्टेशन पर भीख तक मांगी। ये दौर उनकी जिंदगी का ऐसा समय था, जब सिंधु (Sindhutai Sapkal) के मन में हजारों बच्चों की मां बनने का भाव जगा दिया।

एक समय ऐसा आया जब सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) ने अपनी बच्ची को मंदिर पर छोड़ दिया लेकिन बाद में रेलवे स्टेशन पर उन्हें एक बच्चा मिला, जिसे उन्होंने गोद ले लिया। उनके मन में आया कि इन अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी उन्हें उठना चाहिए। सिंधुताई (Sindhutai Sapkal) अनाथ बच्चों के लिए खाने का इंतजाम करने लगी। हजारों बच्चों का पेट भरने के लिए सिंधु रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने लगीं।

सिंधु ताई को मिला हक़ वाला सम्मान –
उनके इस नेक काम के लिए सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) को अब तक 700 से ज्यादा सम्मान मिले है आपको बता दे कि अब तक मिले सम्मान से प्राप्त हुई रकम को सिंधु ताई (Sindhutai Sapkal) ने अपने बच्चों के लालन पोषण में खर्च कर दिया। उन्हें डी वाई इंस्टिटूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च पुणे की तरफ से डाॅक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है। उनके जीवन पर मराठी फिल्म मी सिंधुताई सपकल बनी है जो साल 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को 54वें लंदन फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया जा चुका है।