हादसे में बेटे की मौत से टूटी माँ, Aakash Mind Wall Foundation से गरीब बेटियों के सपनो को दी उड़ान

हादसे में बेटे की मौत से टूटी माँ, Aakash Mind Wall Foundation से गरीब बेटियों के सपनो को दी उड़ान

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Aakash Mind Wall Foundation
Photo - dainik bhaskar हादसे में बेटे की मौत से टूटी माँ, Aakash Mind Wall Foundation से गरीब बेटियों के सपनो को दी उड़ान

7 जनवरी 2009, लखनऊ में एक दर्दनाक हादसा हुआ था. जिसमे 25 वर्षीय युवक (आकाश) की जान चली गई थी, आकाश की मौत से उसकी माँ पूरी तरह से टूट गई थी लेकिन उनका आकाश की मौत से एक मकसद शुरू हुआ जिसने बहुत से गरीब बच्चियों की जिंदगी बदल दी. चलिए जानते है दैनिक भास्कर की मरजिया जाफरपूरी की रिपोर्ट के अनुसार घटना आकाश की माँ से –
”मेरा एक ही बेटा था आकाश, वो अभी मात्र 25 साल का ही था. लेकिन आज मेरी गोद सूनी हो गई है। उस मनहुस घड़ी को मैं आज भी याद कर सिहर जाती हूं जब मेरे आंचल का सुख किसी दर्दनाक हादसे ने छीन लिया। जवान औलाद को खोने का दर्द आज भी मेरी झोली में सिसकता है।’ ये शब्द हैं एक मां और शिक्षिका अनुपमा के।

शादी की तैयारियां भी कर ली थीं, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था

अनुपमा अपने बेटे की मौत पर बताती है कि 7 जनवरी 2009, लखनऊ में एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसमें मेरे बेटे की जान चली गई। इस हादसे के बाद मेरे मुंह से ऐसी चीख निकली कि लंबे समय तक में खामोश रही। मेरे बेटे के लिए मैंने दुल्हन भी ढूंढ़ ली थी। नवंबर 2008 में सगाई कर उसके सिर पर सेहरा सजाना चाहती थी, शादी की तैयारियां भी कर ली थीं, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।

आकाश बहुत कोमल मन का था, बहुत याद आता है

मैं आज भी जब उसके नन्हें कोमल हाथ, उसका बचपन याद करती हूं तो आंख छलक उठती है, मेरे पति की नौकरी ऐसी थी कि वो एक जगह नहीं रह पाते थे , आज यहां ट्रांसफर तो कल कहीं और…बच्चे की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ज्यादा थी और ममता भी उतनी ही।
आकाश पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार था। हमेशा अच्छे नंबर आते। उसे अच्छी जगह इलेक्ट्रिक इंजीनियर की एक अच्छी नौकरी मिली। आकाश बहुत कोमल मन का था। हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए खड़ा रहता था।

आकाश के मददगार स्वाभाव की वजह से शुरू हुआ आकाश माइंड वॉल फाउंडेशन (Aakash Mind Wall Foundation)

आकाश लोगों की इस तरह मदद करता जिसके बारे में किसी को कानों कान खबर नहीं होती। उसकी मौत के बाद हम लोगों को पता चला की उसने कैसे-कैसे लोगों की मदद की है। आकाश को जिंदा रखने के लिए उसकी निस्स्वार्थ मदद करने की भावना को पूरा करना मैंने अपना मकसद बना लिया और मेरे इसी मकसद से शुरुआत हुई आकाश माइंड वॉल फाउंडेशन (Aakash Mind Wall Foundation) की।

आकाश का सपना पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया पति, दोस्त, रिश्तेदारों ने

मेरे बेटे के जाने के बाद मेरी जिंदगी वीरान हो गई। तब पति, दोस्त, रिश्तेदारों ने मुझे संभाला और वो चाहते थे की में आकाश का सपना पूरा करुँ और इसके लिए उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया। उसके बाद मेने शुरआत की वैशाली, गाजियाबाद के एक स्कूल में बच्चियों को पढ़ाने से। उस दौरान मुझे पता चला वैशाली में 8वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए कोई सरकारी स्कूल नहीं है। जिसके कारण यहां रहने वाली गरीब बच्चियों को आगे की पढ़ाई करने का मौका नहीं मिल पता था। कोई घर-घर झाड़ू पोछे का काम करने लगती तो किसी की कच्ची उम्र में ही शादी हो जाती थी। इन बच्चियों को आगे की पढ़ाई के लिए हमने ओपन से 10वीं-12वीं का फॉर्म भरकर उन्हें परीक्षा की तैयारी कराई और परिणाम भी अच्छा प्राप्त किया।

सुविधाओं के अभाव में गरीब की बेटियों को दी उड़ान

साल 2011 आकाश माइंड वॉल फाउंडेशन (Aakash Mind Wall Foundation) के जरिए उन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ली, जो बच्चियां पढ़ना चाहती हैं, लेकिन पैसों और सुविधाओं के अभाव के कारण अपनी पढ़ाई मुकम्मल नहीं कर पा रही थीं। उन बच्चियों को हमने अपने घर से पढ़ाना शुरू किया। जैसे-जैसे बच्चियों की संख्या बढ़ने लगी वैसे-वैसे जगह की भी परेशानी आने लगी। बच्चों की बढ़ती संख्या के कारण हम लोगों ने किराये पर कमरा लेकर उनको पढ़ना शुरू किया। धीरे-धीरे जगह बढ़ाया। पहले तो मैं ये सब अकेले ही संभाल रही थी, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मेरे पति भी इस काम में मेरी मदद करते हैं।

हमारी मेहनत और लगन के फलस्वरूप आज हमारी बच्चियां अच्छी कंपनी में नौकरी भी कर रही हैं। कोई मास्टर कर रहा है। तो किसी की अच्छे परिवार में शादी हो गई है और ये सब मेरे बेटे आकाश के सपने और बच्चियों की शिक्षा की वजह से संभव हुआ है।

आकाश की आत्मा की शांति के लिए हमें समाज को कुछ देने के लिए उठना होगा

बस, भगवान से यही दुआ है कि उसकी आत्मा को शांति मिले। वो जहां भी हो खुश रहे। हर महिला की जिंदगी में कुछ न कुछ परेशानियां सामने आती हैं लेकिन उनसे घबराने और हार कर बैठ जाने से काम नहीं होगा। हमें समाज को कुछ देने के लिए उठना होगा।