infidelity: धोखा देने में महिलाएं आगे, 56% महिलाओं व 54% पुरुषों ने कम से कम एक बार की बेवफाई …

infidelity: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार भारत ही नहीं, दुनियाभर में एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप टैबू रहा है, लेकिन यह भी हकीकत है कि हमेशा से ही समाज में ऐसा होता रहा है। बीते कुछ साल में कानून से लेकर समाज तक में कई बदलाव आए हैं। टेक्नोलॉजी ने भी कई चीजों को आसान बनाया है।

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infidelity: धोखा देने में महिलाएं आगे, 56% महिलाओं व 54% पुरुषों ने कम से कम एक बार की बेवफाई ...

infidelity: ‘मैं एक एमएनसी में मैनेजर हूं। अच्छा कमाता हूं, देश-विदेश घूमता रहता हूं। पत्नी है, घर है। लग्जरी लाइफस्टाइल वाली हर चीज है। फिर भी जिंदगी में कुछ कमी सी महसूस होती है। शादी के 10 साल बाद अब मुझे रिश्तों में पहले जैसी गर्माहट महसूस नहीं होती। इसी वजह से मुझे डेटिंग ऐप पर आना पड़ा। यहां मेरे जैसे काफी लोग हैं, जो लाइफ को एक्सप्लोर करना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं अपनी वाइफ से प्यार नहीं करता या उसे छोड़ना चाहता हूं, लेकिन अकेलेपन और बोरियत को दूर करने के लिए डेटिंग से बेहतर मुझे कुछ समझ नहीं आया।’

36 साल के विनय देश के उन लाखों लोगों में से एक हैं, जो एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें महिलाएं भी हैं और पुरुष भी।
बात डेटिंग वेबसाइट्स की हो रही है तो यह भी जान लें कि दुनिया की पहली डेटिंग वेबसाइट 1995 में शुरू हुई थी, जबकि गूगल की शुरुआत उसके 3 साल बाद 1998 में हुई…

infidelity: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार भारत ही नहीं, दुनियाभर में एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप टैबू रहा है, लेकिन यह भी हकीकत है कि हमेशा से ही समाज में ऐसा होता रहा है। बीते कुछ साल में कानून से लेकर समाज तक में कई बदलाव आए हैं। टेक्नोलॉजी ने भी कई चीजों को आसान बनाया है।
ऐसे में एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशन के लिए डेटिंग ऐप्स यूज करने वाले भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे ही कुछ यूजर्स से बात जब बात की, तो उन्होंने बेवफाई के पीछे बोरियत, उदासी, पति या पत्नी की अनदेखी, उनके रुखेपन और मैरिड लाइफ की इच्छाएं पूरी न होने को जिम्मेदार बताया।


ऐसे ही एक एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडेन की कंट्री मैनेजर सिबिल शिडेल कहती हैं कि भारत में लोग अब अपनी इच्छाएं खुलकर जता रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग ऐप्स के जरिए सिर्फ वर्चुअल फ्लर्ट तक सीमित हैं, तो रियल लाइफ अफेयर शुरू करने वालों की संख्या भी कम नहीं है।
यही वजह है कि 7 साल में डेटिंग ऐप्स का डाउनलोड काउंट दोगुना हो गया, जबकि यूजर्स 19 करोड़ से बढ़कर 32 करोड़ पहुंच गए…

चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप क्या है और इससे जुड़ने वाले लोगों को जिंदगी में क्या कमी खलती है कि वे यहां तक आते हैं?

डेटिंग क्या है

infidelity: आमतौर पर लोग डेटिंग को ही रिलेशनशिप मान लेते हैं। डेट पर गए तो रिलेशनशिप शुरू। लेकिन, ऐसा नहीं है। डेटिंग रिलेशनशिप की तरफ बढ़ा एक कदम भर है।
डेटिंग के दौरान लोग एक-दूसरे को समझते हैं, पसंद-नापसंद जानते हैं। फिर उसके बाद रिलेशनशिप में जाने या नहीं जाने का फैसला करते हैं।
कोई एक वक्त में सिर्फ एक साथी के साथ डेट पर जाता है, तो कुछ लोग एकसाथ कई लोगों को ‘डेट’ करते हैं। कई बार लोग जब रिश्ते को सीरियसली लेने लगते हैं तो फिर डेट पर जाने का फैसला करते हैं। उनका इरादा शादी का भी हो सकता है।
कुछ लोग सिर्फ साथ में घूमने-फिरने के लिए डेट पर जाते हैं, जिसे वे ‘कैजुअल डेटिंग’ कहते हैं। और, डेटिंग के लिए ऐप्स से आसान तरीका और कौन सा हो सकता है भला।
लेकिन, डेटिंग ऐप्स के कई फीचर्स को यूज करने के लिए यूजर्स को पैसा चुकाना पड़ता है, जिससे इश्क का कारोबार बढ़ता जा रहा है…

एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप अब क्राइम नहीं

शादीशुदा कपल्स में से अगर कोई किसी दूसरे पुरुष या महिला से संबंध बनाता है, तो इसे एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर या एडल्ट्री कहते हैं। 2018 से पहले तक देश में ऐसा करना क्राइम था। आईपीसी की धारा-497 के तहत किसी और की पत्नी से संबंध बनाने वाले पुरुष को जुर्माना व 5 साल तक की सजा मिलती थी।

हालांकि, इसमें महिला के खिलाफ न तो केस दर्ज होता था और न ही उसे कोई सजा मिलती थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 150 साल पुराने इस कानून को रद्द कर दिया।

इस कानून के रद्द होने के बाद एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी। आज डेटिंग ऐप्स के यूजर्स इतने ज्यादा हैं कि जनसंख्या के मामले में उनसे आगे सिर्फ चीन और भारत हैं…

अब एक्सपर्ट से समझते हैं कि डेटिंग ऐप्स की तरफ समाज का झुकाव क्यों और कैसे बढ़ा? और इन बदलाव की वजह क्या है

माइंडसेट में कैसे आ रहा बदलाव

सिबिल शिडेल बताती हैं कि टेक्नोलॉजी ने चीजों को आसान बनाया है। हर चीज एक क्लिक पर मिल जाती है। सोशल मीडिया ने हमें सिखा दिया है कि इंस्टैंट रिवॉर्ड से खुशी कैसे मिलती है। जिससे लोगों में अब न तो धैर्य रहा और न ही अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे ज्यादा इंतजार कर सकते हैं। लोगों का खुद पर फोकस बढ़ गया है। इसका असर जिंदगी पर भी पड़ रहा है।
लोग डेटिंग ऐप पर किसी से बात करते हैं, फिर कुछ ही देर में ऊब भी जाते हैं। परफेक्ट केमिस्ट्री की तलाश में किसी और से चैट शुरू हो जाती है।
आखिर लोग इतनी जल्दी शादी से कैसे ऊब जाते हैं और फिर दुखी होकर नया रिश्ता तलाशने लगते हैं। शादी बाद सोचने लगते हैं कि वो जैसा पार्टनर चाहते थे, वो नहीं मिला।
यही वजह है कि कोविड काल में लॉकडाउन लगने के बाद ऐसे ऐप्स पर यूजर्स की संख्या में एक बार फिर उछाल आया…
छोटे शहरों और दूर-दराज के राज्यों में बढ़ते डेटिंग कल्चर का पता एक और डेटिंग ऐप क्वैक-क्वैक के सर्वे से भी होता है। एक लेटेस्ट सर्वे में पता चला है कि पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में क्वैक-क्वैक के यूजर्स में बढ़ोतरी हुई है। बीते 6 महीने में करीब 55 हजार नए यूजर्स ने ऐप में रजिस्ट्रेशन किया है।

घर से बाहर खुशियां तलाशने में पुरुष आगे, महिलाएं कम उम्र में शुरू करती हैं डेटिंग

शादीशुदा जिंदगी में नाखुश होकर डेटिंग ऐप्स पर खुशियां तलाशने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज्यादा है। एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडेन की कंट्री मैनेजर सिबिल शिडेल कहती हैं, भारत में उनके ऐप यूजर्स में 75% पुरुष हैं, तो 35% महिलाएं।
हालांकि, ग्लोबल लेवल पर 60% पुरुष और 40% महिलाएं इस ऐप को यूज कर रही हैं। वहीं, अधिकतर पुरुषों की उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो महिला यूजर्स 26 साल की होने के बाद डेटिंग शुरू कर देती हैं।
पति-पत्नी और वो’ के इस चक्कर में जीवनसाथी को धोखा देने की बात हो तो महिला और पुरुष, दोनों में से कोई कम नहीं है…

एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप में भी पार्टनर से उम्मीदें कम नहीं

शादीशुदा जिंदगी में पति या पत्नी से उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, तो वह इसे शादी से बाहर खोजने लगते हैं। कभी वह उस ‘तीसरे’ में साथी तलाशते हैं, तो कभी उससे प्यार की चाहत रखते हैं। हालांकि, यह बेवफाई कुछ लोगों की आदत का हिस्सा भी हो सकती है। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ वन-नाइट स्टैंड और फन के लिए यह सब करते हैं।

रिलेशनशिप काउंसलर शिवानी मिश्री साधू बताती हैं कि एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स के पीछे कई वजहें होती हैं। लोग शादी में खुशियां नहीं पाते। कभी-कभी ऐसा लगता है कि पार्टनर के लिए चाहे जितना करो, वह खुश नहीं होता। या फिर लोग इसलिए भी एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर कर लेते हैं कि किसी को पता नहीं चलेगा। ऐसे कपल भी आते हैं, जो शादी के एक-दो महीने बाद चीटिंग करते हुए पकड़े गए।

आखिर शादीशुदा होते हुए भी ये लोग चीटिंग करते क्यों हैं, इसकी वजह जानने के लिए सर्वे कराया गया तो ये नतीजे सामने आए…

अब जानिए-बेवफाई के दस बहाने

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरू और पुणे जैसे शहरों में 35-45 साल के 10 हजार यूजर्स के बीच सर्वे कर ग्लीडेन ने उन 10 कारणों का पता लगाया, जिनकी वजह से लोग अपने पति या पत्नी को धोखा देते हैं:

  1. बोरियत: पुराने रिश्तों में एक वक्त के बाद लोगों को जिंदगी नीरस लगने लगती है। तब वे बदलाव चाहते हैं। ऐसे में किसी दूसरे की तरफ आकर्षित होने की संभावना बढ़ जाती है।
  2. कम्यूनिकेशन गैप: यह समस्या हर रिश्ते का कत्ल कर देती है। कोई रिश्ता परफेक्ट नहीं होता, लेकिन बातचीत से उसे परफेक्ट बना सकते हैं। लेकिन भागदौड़ में इसके लिए वक्त नहीं बचता।
  3. रिश्तों में रुखापन: काम की थकान या फिर किसी दूसरी वजह से एक पार्टनर में संबंध बनाने की हिम्मत नहीं बचती। ऐसा लगातार होने पर दूसरा साथी घर से बाहर रुख करता है।
  4. उम्मीदों का पहाड़: जरूरत से ज्यादा उम्मीदें पालना और पूरा न होने पर दुखी होना इंसानी फितरत है। शादी में साथी की अटेंशन, प्यार, टाइम न मिलने के बहाने लोग बेवफा बन जाते हैं।
  5. अतीत के रिश्ते: लोग पिछली रिलेशनशिप की तुलना मौजूदा रिश्तों से करने लगते हैं। मौजूदा पार्टनर को अपना नहीं पाते। जबर्दस्ती की गई शादी में भी लोग पिछले पार्टनर के पास चले जाते हैं।
  6. नए ट्रेंड: कुछ लोग हर वह चीज आजमाना चाहते हैं, जो ट्रेंड में है। हुक-अप कल्चर भी ऐसा ही ट्रेंड है, जिसकी तरफ वे लोग खिंचे चले आते हैं, जो शादीशुदा जिंदगी में खुश नहीं हैं।
  7. पोलोगैमी: एक जैसे माइंडसेट वाले पार्टनर यह समझते हैं कि उनका पार्टनर एकसाथ 2-3 लोगों के प्यार में पड़ सकता है। ऐसे में 2 से ज्यादा पार्टनर एकसाथ हो जाते हैं।
  8. डोमेस्टिक वायलेंस: देश में 10 में से 8 महिलाएं घरेलू हिंसा झेलती हैं। फिजिकल और सेक्शुअल वायलेंस झेलकर तलाक देने की जगह कई बार बाहर खुशियां खोजने लगते हैं।
  9. कदम जब बहक जाएं: कभी-कभी नशे में लोग बहक जाते हैं और इसका भी ध्यान नहीं रहता कि इससे उनकी शादी टूट सकती है। पार्टी, ट्रिप, पुराने दोस्तों से मिलने के दौरान ऐसा होता है।
  10. सेक्सोहोलिक: लत किसी चीज की अच्छी नहीं। ऐसे में लोग नहीं संभल पाते। ऐसे लोगों का खुद पर नियंत्रण नहीं होता। उनके मल्टीपल पार्टनर भी हो सकते हैं।

खैर, बहाने अपनी जगह हैं, लेकिन अगर किसी की फितरत ही धोखा देने की हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शादी को कितने साल हो चुके हैं…
अभी आपने जाना कि किसी के बेवफा होने की वजह क्या हो सकती है और अब जानिए कि कब बेवफाई बर्दाश्त कर ली जाती है और कब माफी नहीं मिलती।

बेवफा को माफी मिलने की कितनी गुंजाइश

शादी को अगर 5 साल हो गए हों, तो एक साथी के बेवफाई करने पर उसे दूसरे से माफी मिलने की संभावना ज्यादा रहती है।
ग्लीडेन के सर्वे में 44% लोगों ने 5 साल से ज्यादा पुराने रिश्ते में सिर्फ सेक्स के लिए बेवफाई करने वाले पार्टनर को माफ कर देने की बात कही।
जिनकी शादी को 1 साल से कम हुआ था, उनमें से 81% ने कहा कि वे धोखा देने वाले पार्टनर को माफ नहीं करेंगे।
शादी नहीं, ‘डोमेस्टिक पार्टनरशिप’ में रहने की चाहत
कुछ दशक पहले तक बच्चों की शादी का जिम्मा परिवार के बड़े-बुजुर्गों का हुआ करता था। बीते 2 दशकों में दुनिया तेजी से बदली और अपने लिए लाइफ पार्टनर खोजने का चलन यंगस्टर्स में तेजी से बढ़ा। लेकिन, अब स्मार्टफोन पर सिर्फ एक टच से दुनिया में छा जाने वाले यंगस्टर्स का मूड फिर बदलता दिख रहा है।
सोशल मीडिया पर इंस्टैंट हैपीनेस, हाई स्पीड-हाई टेक्नोलॉजी के लिए क्रेजी ये युवा रिलेशनशिप में कमिटमेंट तो चाहते हैं, लेकिन साथ रहने के लिए शादी की बजाए लिव-इन रिलेशनशिप यानी ‘डोमेस्टिक पार्टनरशिप’ इनकी पहली पसंद है।
लिव-इन पसंद करने वालों के पास इसकी अपनी वजहें भी हैं…

डोमेस्टिक पार्टरनशिप को सुप्रीम कोर्ट भी मानता है शादीशुदा

बिना शादी किए लंबे समय तक एकसाथ पति-पत्नी की तरह रहना ही डोमेस्टिक पार्टरनशिप यानी लिव-इन रिलेशनशिप कहलाता है। भारत में इसके लिए कोई कानून नहीं बना है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में लंबे समय तक साथ रहने वाले कपल को पति-पत्नी माना है।

2006 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि 2 वयस्कों को उनकी मर्जी से साथ में रहने का अधिकार है। इसके बाद दिए गए फैसलों में सुप्रीम कोर्ट लिव-इन में रहने वाले कपल को शादीशुदा मानने से लेकर उनके बच्चे को पैतृक संपत्ति में हक देने तक कई फैसले दे चुका है।

लिव-इन को वैधता मिलने के बाद कपल्स भी अब अपनी झिझक छोड़ खुलकर रिश्ते को स्वीकार कर रहे हैं…

कपल्स के लिए हेल्दी रिलेशनशिप शादी से बढ़कर

डेटिंग वेबसाइट ‘एंड वी मेट’ की फाउंडर शालिनी सिंह कहती हैं कि कभी मैचमेकिंग और शादी एक-दूसरे के पर्याय हुआ करते थे। लेकिन, अब ऐसे लड़के-लड़कियों की संख्या काफी है, जिन्हें अपनी जिंदगी में एक साथी की तलाश तो है, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहते।
ऐसे में ये सिंगल युवा डेटिंग साइट्स पर आ रहे हैं। इसकी वजह जानने के लिए ‘एंड वी मेट’ ने दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू जैसे शहरों में 25-35 साल के युवाओं के बीच सर्वे किया।
इनमें अधिकतर युवाओं ने शादी को महज ‘लेबल’ माना और कहा कि वे कमिटमेंट की वैल्यू करते हैं और हेल्दी रिलेशनशिप उनके लिए शादी के ‘लेबल’ से बढ़कर है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में रिश्ते बदल जाने का डर ज्यादा दिखा। इस डर की वजह समाज की ‘उम्मीदों का बोझ’ है, जो शादी के बाद उनपर बढ़ जाता है।
इस सबके बावजूद बेवफाई करने वाले भी अपने पति या पत्नी से अलग नहीं होना चाहते। लेकिन, कितना अच्छा हो कि ऐसी नौबत ही न आए, इसके लिए एक्सपर्ट की इन बातों का रखें ख्याल…