दादी की गोद से लपककर मासूम नानी के पास आई, कोर्ट ने सुनाया फैसला …

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हाईकोर्ट High court
Picture credit (dainik Bhaskar)

एक सुनवाई के दौरान एक 2 साल की बच्ची ने कोर्ट का फैंसला आसान कर दिया। हुआ यह कि छोटी बच्ची अपनी दादी की गोद से लपकर नानी की गोद में जा बैठी।

सूत्रों की माने तो 2 वर्षीय मासूम बच्ची की माँ मर चुकी है और उसके पिता दहेज हत्या के आरोप में जेल में है। फिर बच्ची की कस्टडी को लेकर दादी व नानी में विवाद हो गया। मामला खुद के स्तर पर नहीं निपटा तो नानी हाईकोर्ट पहुंच गई। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान पहले तो हाईकोर्ट (High court) ने नानी को गार्जियनशिप के लिए निचली अदालत जाने को कहा था।

जब काेर्ट में सुनवाई चल रही थी तो बच्ची दादी की गोद में बैठी बच्ची नानी को देखकर खुशी से फूली नहीं समाई और नानी के पास जाने के लिए पूरी तरह झुक गई। दादी ने भी बच्ची को नानी की गोद में दे दिया। उसके बाद दादी ने वापस लेना चाहा तो बच्ची नहीं आई। हाईकोर्ट (High court) ने मानवीय रुख अपनाते हुए कहा कि बच्ची नानी के पास ज्यादा खुश रहेगी और बच्ची की कस्टडी नानी को सौंप दी। साथ ही दादी को कस्टडी के लिए निचली कोर्ट जाने की छूट दी।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता जमना देवी की बेटी प्रियंका की शादी बिलाड़ा क्षेत्र के खेमाराम उर्फ जितेंद्र जाट से हुई थी। उससे एक बच्ची कुकु भी हुई। कुछ समय बाद ससुराल में ही प्रियंका की मृत्यु हो गई। तब से मासूम कुकु दादा-दादी के पास ही रह रही है। नानी जमनादेवी ने बच्ची की कस्टडी के लिए दादी से आग्रह किया तो मना कर दिया। कोर्ट ने बच्ची को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश दिए।

पहले कोर्ट ने यह भी कहा कि अब इतना समय हो गया और दो साल की बच्ची है। वैसे भी बच्ची आपके पास नहीं आएगी। तब नानी बोली- ऐसा नहीं है साब, बच्ची आएगी। जैसे ही बच्ची ने नानी को देखा तो खुशी जाहिर करते हुए उनके पास जाने के लिए दादी की गोद में नीचे झूल गई और नानी की ओर लपकी। बच्ची के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। नानी के पास जाते ही वह बहुत खुश हुई।

जब यह वाकया हुआ तो कोर्ट में मौजूद वकील के अल्वा अन्य लोग भी हैरान रह गए। कोर्ट ने समझ लिया कि बच्ची नानी के पास खुश है। जस्टिस संदीप मेहता व अभय चतुर्वेदी ने ऑब्जर्व करते हुए मौखिक रूप से कहा कि इस केस का फैसला तो खुद बच्ची ने तय किया है।