सीने पर गोली खाये, बच्चे को दिया जन्म लेकिन डटी रहे मजदूर… आखिर क्यों मनाते है Labor Day…

सीने पर गोली खाये, बच्चे को दिया जन्म लेकिन डटी रहे मजदूर,.. आखिर क्यों मनाते है Labor Day...

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सीने पर गोली खाये, बच्चे को दिया जन्म लेकिन डटी रहे मजदूर,..आखिर क्यों मनाते है Labor Day...

खून-पसीना बहाकर कड़ी मेहनत से दिन रात काम कर देश की प्रगति में योगदान देने वाले मजदूरों को 1 मई को मनाये जाने वाले मजदूर दिवस (Labor Day) की ढेर सारी बधाई. लेकिन आपको बता कि देश की प्रगति में योगदान देने वाले मजदूरों को मजदूर दिवस (Labor Day) के बारे में कुछ नहीं जानते है। उनको तो यह भी नहीं पता कि यह मजदुर दिवस (Labor Day) होता क्या है.

आप यह जानकर हैरान हो जाओगे कि मजदूरों को मजदूर दिवस (Labor Day) के बारे में पता तक नहीं है। उनको मिलने वाली लाभकारी योजनाओं का मिलना तो दूर उन्हें उसके बारे में जानकारी तक नहीं है. चलिए जानते है कुछ महिला मजदूरों की कहानी

प्रतिदिन मजदूर दिवस हमारे लिए – रेखा रानी और पूजा

”मजदूर वर्ग केवल काम करने के लिए ही पैदा हुआ है, जो बिना किसी छुट्टी के साल के 365 दिन काम करता है। मालिक अपने मर्जी से जो दिहाड़ी देते है वही लेनी पड़ती है, सरकारी नौकरी करने वालों के वेतन हर पांच साल के बाद बढ़ते हैं। महंगाई बढ़ने पर महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। क्या मजदूरों के लिए महंगाई नहीं बढ़ती है। एक मई को मनाये जाने वाला मजदूर दिवस (Labor Day) दो समय की रोटी के लिए संघर्ष करने वाले मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण दिवस नहीं है।”

धरने पर बैठी एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन उठी नहीं मनीषा काले

यह घटना हुई थी महाराष्ट्र (Maharashtra) के बीड जिले में, जहाँ मनीषा काले अपने परिवार के सदस्यों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी रही. मनीषा काले उस समय गर्भवती थी पुलिस ने प्रसूता मनीषा काले (Manisha Kale) को उसे और उसके बच्चे को अस्पताल पहुंचाने की पेशकश की लेकिन वह वहीं अड़ी रही. मनीषा काले का कहना था कि उसके रिश्तेदार अप्पाराव के लिए दो साल पहले राज्य की सबरी आवास योजना के तहत एक मकान मंजूर हुआ था लेकिन उसे न तो ग्राम पंचायत से जमीन मिली और न ही योजना के तहत कोई धनराशि मिली.

NDTV इंडिया कि रिपोर्ट के मुताबिक मनीषा काले का कहना है कि ”उसने परिवार के साथ पिछले तीन महीने में इस मुद्दे पर दो बार प्रदर्शन किया लेकिन जब उससे कोई फायदा नहीं हुआ तब वे दस दिन पहले धरने पर बैठ गये. मनीषा काले को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा होने लगी और उसने एक बाल शिशु को जन्म दिया. यह उसकी तीसरी संतान है. एक पुलिस (Police) अधिकारी के अनुसार शिवाजी नगर थाने के निरीक्षक केतन राठौड़ यह खबर सुनकर तुरंत मौके पर एंबुलेंस लेकर पहुंचे लेकिन मनीषा ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया. जच्चा और बच्चा का स्वास्थ्य ठीक है लेकिन परिवार शुक्रवार को भी धरने पर बैठा रहा. जिलाधिकारी राधा धर्मा ने इस संबंध में किसी कॉल या संदेश का जवाब नहीं दिया.”

कब और कहाँ से हुई मजदूर दिवस मानाने की शुरुआत

विश्व में सबसे पहले 1 मई 1886 को अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (Labor Day) की शुरुआत हुई थी। 1 मई 1886 को अमेरिका की मजदूर यूनियनों ने हड़ताल की थी, उनकी मांग थी कि वे 8 घंटे से अधिक काम नहीं करेंगे, उनके काम का समय कम किया जाये. हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। ये मजदूर 10 से 15 घंटे काम करते थे बीएस इसी का विरोध कर रहे थे।

पुलिस ने मजदूरों पर शुरू कर दी थी फायरिंग

इनकी इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में एक बड़ा बम धमाका हुआ था। हालांकि ये धमाका किसने किया इसका तो पता नहीं चल पाया लेकिन इसके बाद पुलिस ने मजदूरों पर फायरिंग शुरू कर दी थी। जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में यह घोषणा किया गया था कि1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (Labor Day) मनाया जाएगा और इस दिन सभी मजदूरों को काम से अवकाश भी दिया जाएगा। अमेरिका ने भी घोषणा की कि 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया है। साथ ही अन्य देशो ने भी ऐसा ही किया. भारत समेच अन्य कई देशों में मजदूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित कानून लागू है।