सुप्रीम कोर्ट की फटकार से चुनाव आयोग एक्शन में, माया, मेनका, योगी, आजम के चुनाव प्रचार पर रोक

0
880
आचार सहिंता CODE OF CONDUCT
Menka Gandhi, Mayavati, Hema Malini (Internet Pic)

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की फटकार से चुनाव आयोग ने आचार सहिंता (CODE OF CONDUCT) का उल्लंघन करने पर और गलत बयान बाजी देने पर उत्तर प्रदेश से चार नेताओं के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। इस बयान बाजी में दो महिलाएं है जिनमे बसपा प्रमुख मायावती तथा भाजपा नेता मेनका गांधी शामिल है। इनके अलावा सपा नेता आजम खान तथा विवादों में बने रहने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है।

योगी-आजम 3-3 और माया-मेनका 2-2 दिन चुनाव प्रचार पर रोक लगी है। दरअसल, एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा था कि हेट स्पीच के मामलों में आपने क्या कदम उठाया है। इस पर आयोग ने जवाब दिया था कि हमारे अधिकार सीमित हैं और हम नोटिस भेजकर नेताओं से जवाब ही मांग सकते हैं। परन्तु सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार के बाद चुनाव आयोग ने थोड़ी शक्ति तो दिखाई है।


भाजपा की नेता मेनका गांधी एक औरत है फिर भी उनके बयान से बार-बार धमकी की बू आ रही है। वो अपने क्षेत्र के मतदाताओं को धमाका रहे है की वोटिंग के आधार पर ही विकास कार्य होगा। तो क्या हमें समझना चाहिए की महिलाओं की संवेदनशीलता में कमी आ गई है या फिर वो भी जीतने के लिए कई हथकंडे अपना रहे है।

दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती है जो की किसी विशेष धर्म के लोगों को वोट करने की बात कर रही है तथा चुनाव को धार्मिकता के आधार पर बाँटने की कोशिश करती नजर आयी।

मायावती ने कहा था कि मुस्लिम मतदाताओं को भावनाओं में बहकर अपने वोट नहीं बंटने देना है।
उधर मेनका गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा था कि यदि मुस्लिम उन्हें वोट नहीं देते हैं तो वे उन्हें नौकरी नहीं दे सकेंगी। उनको यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा कि वे मुस्लिमों के सहयोग के बिना यह चुनाव जीतें।

बात करें योगी की तो, उन्होंने बजरंग बली और अली का जिक्र करके मायावती पर निशाना साधा था। तथा हिन्दू मुस्लिम को धार्मिकता के हिसाब से बांटने की कोशिश की।

सपा नेता आजम खान ने विवादास्पद बयान दिया है। माना जा रहा है कि उनका इशारा अभिनेत्री और रामपुर से भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा की तरफ था। हालांकि बाद में आजम ने सफाई देते हुए कहा कि अगर मैं दोषी पाया गया तो चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब देखना होगा की वह अपनी बात पर कायम रहते है या नहीं। आजम खान के महिला विरोधी बयान पर घोर निंदा हो रही है।

गौरतलब है कि आजम खान ने रविवार को रामपुर में कहा, “मैं सवाल करता हूं कि क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी। 10 बरस जिसने रामपुर के लोगों का लहू पिया, जिसकी उंगली पकड़कर हम रामपुर लेकर आए। रामपुर की गलियां और सड़कों की पहचान कराई। उसके शरीर से किसी का कंधा नहीं लगने दिया, आप गवाही दोगे। छूने नहीं दिया, गंदी बात नहीं करने दी। आपने 10 साल अपना प्रतिनिधित्व कराया। लेकिन आप और मुझमें क्या फर्क है। रामपुर वालो, उत्तरप्रदेश और हिंदुस्तान वालो, उसकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लग गए, मैं 17 दिन में पहचान गया। आगे उन्होंने एक घटिया बयान दिया जिसको बताने में भी शर्म आती है। हालाँकि बाद में उन्होंने सफाई भी दी।

यदि बात की जाये महिला नेताओं की तो आचार सहिंता के उल्लंघन में महिलाएं ज्यादा आगे है, इनमे एक नाम हेमा मालिनी का भी जोड़ लिया जाये तो कोई बुराई नहीं है क्योंकि उन्होंने भी एक स्कूल में चुनावी प्रचार किया है तथा उनके खिलाफ भी चुनाव आयोग में शिकायत पहुँच चुकी है।


कानून को अपनी मुट्ठी में समझने वाले नेताओं को अब समझ आया की आचार सहिंता (CODE OF CONDUCT) का उल्लंघन करना कितना भारी पड़ सकता है।