मुख्यमंत्री के राजनितिक गढ़ जोधपुर में, दलित दुल्हन की पुलिस पहरे में विदाई

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दलित दुल्हन
file photo
  • दूल्हा खुद पुलिस कांस्टेबल

जोधपुर के दुगर गांव में शनिवार रात एक दलित दुल्हन की बारात आई परन्तु बारात पर गांव के तथाकथित उच्च जाति के लोगों ने हमला कर दिया। जिससे बारातियों को गंभीर छोटे भी आयी। दलित की बारात का डीजे बजाकर नाचना गाना गांव के लोगों को पसंद नहीं था।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राजनितिक गढ़ माने जाने वाले जोधपुर के हालात इस देश की जातीय व्यवस्था को बयां करती है।

सूत्रों के अनुसार दूल्हा खुद पुलिस कांस्टेबल है। घटना के बाद पुलिस वह पहुंची है तथा हमले के मामले में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है की बारात में डीजे बजाने को लेकर यह विवाद हुआ तथा रविवार को पुलिस पहरे में शादी व विदाई करवाई गई।
लोरड़ी देजगरा निवासी व जोधपुर पुलिस लाइन में तैनात पुलिस कांस्टेबल सवाईराम पुत्र देवाराम मेघवाल ने शनिवार रात बालेसर पुलिस थाने में रिपोर्ट पेश कर बताया कि “उसकी शादी दुगर गांव निवासी नेताराम मेघवाल की पुत्री के साथ होनी थी। 9 फरवरी को देर शाम साढ़े सात बजे उसकी बारात दुगर गांव में पहुंची थी। बारात में एक बस व तीन चार अन्य वाहन थे। गांव में प्रवेश होने पर बाराती ढोल बजाकर नाचने लगे। इतने में दुगर गांव के कुछ लोग आए और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए कहा कि हमारे गांव में क्यों नाच रहे हो। इसके बाद उन लोगों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया।”
अचानक हुए हमले से बाराती डर गए तथा हमले में गाड़ी चला रहे ओमप्रकाश पुत्र पूनाराम के साथ मारपीट की गई। उसका सिर फोड़ दिया गया। शरीर में जगह-जगह चोटें आई। बीच बचाव करने आए बाराती भवानीसिंह, श्रवणराम, सागरराम, अर्जुन के साथ भी मारपीट की गई। कई बारातियों के चोटें आई अाैर गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए।
पुलिस ने रात को ही घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति नियंत्रण में किया। तथा रविवार सुबह पुलिस ने विक्रमसिंह पुत्र सुमेरसिंह, कालूसिंह पुत्र गजेसिंह, गुलाबसिंह पुत्र मूलसिंह, अजीतसिंह पुत्र भीखासिंह, लक्ष्मणसिंह पुत्र सुमेरसिंह, राजूसिंह पुत्र हरिसिंह, पेहपसिंह पुत्र पदमसिंह को गिरफ्तार कर लिया।

आजादी के 70 साल बाद भी इस देश में जाति आधारित नफ़रतें इस कदर जड़ें जमा रखी है। बार बार बदलती सरकारें भी दलितों पर होने वाले हमले को नहीं रोक पा रहे है।
एक दलित जाति की दुल्हन हो क्या यह सपने देखने का अधिकार नहीं है की उसकी बारात धूम धाम से आये और उसकी विदाई खुशी-खुशी हो।