ममता भूपेश ने महिला एवं बाल विकास, जन अभियोग निराकरण, अल्पसंख्यक एवं वक्फ विभाग राज्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, जानिए क्या क्या होता है इस विभाग में

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महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने 12:15 बजे केबिन में पूजा कराई. इसके बाद अपना पदभार संभाला. मंत्रालय भवन में लगभग आधा घंटा ठहरने के बाद सिकराय के लिए रवाना हो गई. महिला मंत्री व सिकराय से विधायक ममता भूपेश ने महिला एवं बाल विकास, जन अभियोग निराकरण, अल्पसंख्यक एवं वक्फ विभाग राज्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पहली बार दौसा व सिकराय क्षेत्र में पहुंची. गुरुवार को दोपहर करीब 2 बजे दौसा जिले पहुंचते ही सैकड़ों समर्थकों ने भूपेश को फूलमालाओं से स्वागत किया. इसके बाद दौसा बायपास से खुली जीप में समर्थक भूपेश को दौसा शहर में लेकर आए. रास्ते में जगह-जगह दर्जनों जगह लोगों ने स्वागत द्वार लगाए.

पत्रकारों से बातचीत करते हुए ममता भूपेश ने कहा कि उनकी प्राथमिकता महिलाओं के हक में कार्य करने की होगी. महिलाओं के सम्मान की रक्षा की जाएगी. वहीं सिकराय क्षेत्र के विकास में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी. उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने जो उन्हें प्यार दिया वे उसे कभी नहीं भूल पायेगी.

आखिर क्या हैं? महिला तथा बाल विकास विभाग-

महिला तथा बाल विकास विभाग की स्थापना वर्ष 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अंग के रूप में की गई थी. उद्देश्य महिला तथा बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना था. 30 जनवरी 2006 से इस विभाग को मंत्रालय का दर्जा दे दिया गया है. इस मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य है महिला तथा बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना.

इस मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य है महिला तथा बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना था. महिला तथा बच्चों की उन्नति के लिए एक नोडल मंत्रालय के रूप में यह मंत्रालय योजना, नीतियां तथा कार्यक्रम का निर्माण करता है; कानून को लागू करता है, उसमें सुधार लाता है और महिला तथा बाल विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाले सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों को दिशा-निर्देश देता है व उनके बीच तालमेल स्थापित करता है. इसके अलावा अपनी नोडल भूमिका निभाकर यह मंत्रालय महिला तथा बच्चों के लिए कुछ अनोखे कार्यक्रम चलाता है. ये कार्यक्रम कल्याण व सहायक सेवाओं, रोजगार के लिए प्रशिक्षण व आय सृजन एवं लैंगिक सुग्राहता को बढ़ावा देते हैं. ये कार्यक्रम स्वास्थ्य, शिक्षा व ग्रामीण विकास इत्यादि के अन्य क्षेत्रों में भी एक पूरक व संपूरक भूमिका निभाते हैं.