विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम से और कम हो जायेंगे आरक्षित के प्रोफेसर-केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल

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अनुप्रिया पटेल
अनुप्रिया पटेल

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एनडीए की बैठक में रोस्टर सिस्टम का मामला उठाया. उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने पर आरक्षित वर्ग के प्रोफेसर की संख्या और अधिक घट जाएगी.
इस फैसले से एससी-एसटी व ओबीसी वर्ग में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इससे पहले भी पिछले साल मानसून सत्र की बैठक से पहले एनडीए की बैठक में अनुप्रिया पटेल ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था.
इसका फर्क बह पड़ा है कि केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम के जरिए होने वाली भर्ती पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी थी. लेकिन पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले में याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद एक बार फिर से इस मामला ने तूल पकड़ लिया है.

PM का नारी शक्ति को सलाम

अनुप्रिया पटेल अभी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री है. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली में आयोजित एनडीए की बैठक में विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम के जरिए प्रोफेसर भर्ती का मामला प्रमुखता से उठाया गया .

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी व ओबीसी के प्रोफेसर की संख्या न के बराबर

अभी की स्तिथि देखें तो देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी वर्ग के प्रोफेसर की संख्या महज 39 (3.47 प्रतिशत), एसटी वर्ग के प्रोफेसर की संख्या महज 8 (0.7 प्रतिशत) और ओबीसी वर्ग के प्रोफेसर की संख्या शून्य है. जबकि सामान्य वर्ग के प्रोफेसरों की संख्या 1125 में से 1071 (95.2 प्रतिशत) है.
इसी तरह इन विश्वविद्यालयों में एससी वर्ग के एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या 130 (4.96 प्रतिशत), एसटी वर्ग के एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या 34 (1.30 प्रतिशत) और ओबीसी वर्ग के एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या शून्य है. जबकि सामान्य वर्ग के एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या 2620 में 2434 (92.90 प्रतिशत) है.

क्यों हुआ विरोध
यदि विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में रोस्टर सिस्टम के जरिए प्रोफेसरों की भर्ती होगी तो आरक्षित वर्ग के प्रोफेसरों की संख्या आने वाले समय में और अधिक घट जाएगी. तथा पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों की संख्या बिलकुल नहीं रहेगी.